Class 12 Home science ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर ) 2024 ( 15 Marks ) | PART – 5

B.S.E.B इंटर बोर्ड परीक्षा 2024 के लिए यहां पर गृह विज्ञान का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर 2024 दिया गया है। जो आपके इंटर बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। तथा दोस्तों Inter Board Exam 2024 Home Science Short Answer Question Answer  भी दिया गया है। यह सभी प्रश्न बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए शुरू से अंत तक जरूर देखें।


( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर ) 2024 ( 15 Marks ) | PART – 5

गृह विज्ञान कक्षा 12 का प्रश्न उत्तर पीडीएफ डाउनलोड

Q42. वस्त्रों के धुलाई के सामान्य नियम क्या है?

उत्तर ⇒ वस्त्रों की धुलाई के सामान्य नियम निम्नलिखित हैं

(i) मैले वस्त्रों को शीघ्र धोना चाहिए। मैले वस्त्रों को दोबारा पहनने से उनमें मैल जम जाती है जिससे उसे साफ करना कठिन हो जाता है।
(ii) मैले वस्त्र को उतार कर किसी टोकरी, टब या थैले में रखना चाहिए। मैले कपड़े इधर-उधर फेंकना नहीं चाहिए अन्यथा धोते समय एकत्र करने में कठिनाई होती है।
(iii) कपड़ों को धोने से पूर्व उनकी प्रकृति के अनुसार अलग-अलग कर लेना चाहिए। ऊनी, रेशमी, सूती तथा कृत्रिम तंतुओं से बने वस्त्रों को अलग-अलग विधियों द्वारा ___धोना चाहिए। सूती तथा रंगीन कपड़ों को भी अलग-अलग करके धोना चाहिए।
(iv) वस्त्रों को धोने से पहले उनकी मरम्मत अवश्य कर लेनी चाहिए तथा उन पर लगे दाग धब्बे को भी सुखाना चाहिए।
(v) धुलाई के लिए कपड़े की प्रकृति के अनुसार ही साबुन तथा डिटर्जेन्ट का चुनाव करना चाहिए।
(vi) वस्त्रों की धुलाई से पूर्व धोने के लिए प्रयोग में आने वाले सभी सामानों को एक स्थान पर एकत्र कर लेना चाहिए।
(vii) वस्त्रों को स्वच्छ पानी में ठीक तरह से धोकर उनमें से साबुन या डिटर्जेंट निकाल देना  चाहिए अन्यथा वस्त्र के तंतु कमजोर हो जाते हैं।
(viii) सुखाने के लिए सफेद वस्त्रों को उल्टा करके धूप में सुखाना चाहिए तथा रंगीन वस्त्रों को छाया में सुखाना चाहिए अन्यथा उनके रंग खराब होने की संभावना रहती है। सफेद ..वस्त्रों को अधिक समय तक धूप में पड़ा रहने दिया जाय तो उन पर पीलापन आ जाता है।
(ix) सुखाते समय वस्त्रों को हैंगर पर लटका कर सुखाना चाहिए, जिससे उन पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
(x) सुखाने के बाद वस्त्रों को इस्तरी करके ही रखना चाहिए।


Q43. शिशुओं के वस्त्रों के चुनाव आप किस प्रकार करेंगी?

उत्तर ⇒ शिशुओं के लिए वस्त्रों का चुनाव निम्न प्रकार से करेंगे

(i) शिशु के लिए सूती कपड़ा सबसे अच्छा होता है। सूती वस्त्र में भी कोमल तथा हल्का – वस्त्र शिशु की कोमल त्वचा को क्षति नहीं पहुँचाता। सूती वस्त्र में सरंध्रता (porous) होने के कारण शिशु की त्वचा की पसीना सोख लेता है, उसे चिपचिपा नहीं होने देता। शिशुओं के लिए रेशमी या नायलान वस्त्र कष्टदायक होता है।
(ii) शिशु के वस्त्रों को बार-बार गंदे होने के कारण कई बार धोना पड़ता है। इसलिए शिशुओं के वस्त्र ऐसी होनी चाहिए जिन्हें बार-बार धोया तथा सुखाया जा सके। वस्त्र ऐसा नहीं होना चाहिए जिसे घर में धोया जा सके या जिसे सूखने में बहुत अधिक समय लगता हो।
(iii) शिशुओं के वस्त्र हमेशा साफ तथा कीटाणुरहित होना चाहिए। वस्त्रों को कीटाणुरहित करने के लिए उन्हें गर्म पानी में धोना चाहिए तथा डेटॉल के पानी में भिगोना चाहिए। इसलिए वस्त्र ऐसा होना चाहिए जो गर्म पानी तथा डेटॉल या कीटाणुनाशक पदार्थ को सहन कर सके।
(iv) उसके गर्म कपड़े भी ऐसे होने चाहिए जो गर्म पानी में सिकुड़े नहीं।
(v) शिशुओं के कपड़ों की संख्या अधिक होनी चाहिए क्योंकि उसके कपड़े गंदे हो जाने । पर कई दिन में कई बार बदलने पड़ते हैं।
(vi) शिशुओं के कपड़े मांड रहित होने चाहिए तथा इलास्टिक वाले नहीं होने चाहिए।
(vii) शिशुओं के कपड़े सामने, पीछे या ऊपर की ओर खुलने चाहिए, जिससे शिशु को सिर से कपड़ा न डालना पड़े।
(viii)शिशुओं के वस्त्रों में पीछे की ओर बटनों के स्थान पर कपड़े से बाँधने वाली पेटियाँ (ties) या बंधक होने चाहिए क्योंकि बटन पीछे होने से शिशु के लेटने पर उसे चुभ सकते हैं।
(ix) शिशुओं के कपड़ों के रंग व डिजाइन अपनी रुचि के अनुसार होने चाहिए, परंतु रंग ऐसा होना चाहिए जो धोने पर निकले नहीं क्योंकि शिशु के वस्त्रों को अधिक धोना पड़ता है।
(x) शिशुओं के वस्त्रों में मजबूती का इतना महत्त्व नहीं होता है क्योंकि शिशुओं की वृद्धि बहुत तीव्र गति से होती है। जब तक शिशु के कपड़ों के फटने की स्थिति आती है वे छोटे हो चुके होते हैं।


Q44. एक किशोरी के लिए परिधानों के चुनाव में किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?

उत्तर ⇒ एक किशोरी के लिए वस्त्र खरीदते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखूगी —

(i) प्रयोजन-वस्त्र प्रयोजन के अनुकूल लूँगी। इसके लिए रेशों की विशेषताओं, उसके गुण, सूत बनाने की विधि, सूत से की गयी बुनाई, उसके गुण-अवगुण तथा विशेषताओं को ध्यान में रखूगी।

(ii) टिकाऊपन वस्त्र की मजबूती/टिकाऊपन, धागों की बँटाई, वस्त्र की बुनाई एवं उसकी देखरेख पर ध्यान दूंगी।

(iii) ऋतु एवं मौसम से अनुकूलता मौसम के अनुकूल वस्त्रों को पहनने वाली खरी,गी, क्योंकि वस्त्र का कार्य शरीर की गर्मी और सर्दी से रक्षा करना होता है और शरीर के सामान्य तापक्रम को प्रतिकूल परिस्थितियों में बनाये रखता है।

(iv) उचित रंग रंग हमारी मनोभावनाओं को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं। व्यक्ति, त्वचा और समय के अनुरूप रंगों का चुनाव कर वस्त्र खरीदूंगी। ..

(v) वस्त्रों की धुलाई कुछ वस्त्रों को प्रतिदिन तथा कुछ को यदा-कदा समय-समय धोना पड़ता है। कौन-से साबुन किस वस्त्र के सौन्दर्य एवं रंग को नष्ट नहीं करेंगे। कौन से रेशे क्षारीय माध्यम में नष्ट नहीं होते हैं और किन पर अम्लों का बरा प्रभात पड़ता है? उसी के अनुरूप शोधक सामग्रियों का चुनाव करना अति आवश्यक
(vi) वस्त्रों की देखरेख, सुरक्षा एवं संचयन-पहनने के बाद वस्त्रों को किस प्रकार टाँगना है? किस प्रकार के रेशों में कीड़े लगते हैं? किसे कितने समय तक बक्से में बंद रखा जा सकता है आदि बातों पर ध्यान देना अति अनिवार्य है।

(vi) फैशन और शैली—इसका महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। वैसे तो फैशन और शैली में परिवर्तन होते रहते हैं किन्तु वर्तमान में यह किस स्थान के लिए तथा किसके अनुकल है. इसकी जानकारी आवश्यक होती है।

(viii)किस्म और श्रेणी-वस्त्रों के मूल उद्गम और रचना संबंधी विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी से उसके किस्म एवं श्रेणी को समझने का अवसर प्राप्त होता है, इससे वस्त्र का प्रयोजनार्थ, उचित चयन की क्षमता बढ़ती है।

(ix) मूल्य-यह अति आवश्यक है। आर्थिक स्थिति के अनुसार महँगे तथा सस्ते वस्त्रों का चयन करूँगी।


Q45. वस्त्रों का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक महत्त्व क्या है? [2009A]

उत्तर ⇒ वस्त्रों का सामाजिक और मनोवैज्ञानिक महत्त्व—किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से जानने से पहले सबसे पहला प्रभाव जो पड़ता है वह उसके परिधानों का होता है। वह व्यक्ति किस तरह से अपने आपको सजाता है, उसके चलने का तरीका, उसके बात करने का तरीका, वह किस तरह से अपने आप को ध्यान रखता है। इन सब बातों पर उसका पूरा व्यक्तित्व निर्भर करता है और यही तथ्य व्यक्तित्व को उभार कर सामने लाते हैं। उस व्यक्ति के परिधान किस हद तक उस व्यक्ति को सामने लाते हैं यह बात पहने गए वस्त्रों के डिजाइन, रंग आदि पर निर्भर करती है। किंतु, एक प्रश्न हर व्यक्ति के दिमाग में आता है कि आखिर मनुष्य ने कपड़ा पहनना शुरू क्यों किया? विभिन्न प्रकार की ड्रेस कैसे बनी?
बहुत से एंथ्रोपालोजिस्ट्स ने इन प्रश्नों के जवाब ढूँढने की कोशिश की है और इसके चलते काफी जानकारियाँ सामने आई हैं। समाज में बहुत से मनोवैज्ञानिकों ने भी अपने-अपने विचार इसमें जोडे हैं। प्रत्येक देश में अपनी-अपनी कथाएँ और मनोविज्ञान, परिधानों के बारे में अलग-अलग हैं। हम एकदम निश्चित. रूप से यह नहीं कह सकते कि आखिर मनुष्य ने कपड़ा पहनना क्यों शरू किया था? किंतु कुछ सिद्धांत ऐसे सामने आए हैं जिनके ऊपर बहुत से लोग विश्वास कायम करते हैं और बहुत से नहीं भी करते हैं।


Q46.बिहार के किसी एक शिल्प का वर्णन करें। [2020A|

उत्तर ⇒ सूजनी बिहार की प्रमुख कढ़ाई है। पुराने सूती कपड़े जैसे—साडी धोती आदि की कई तह बिछाकर सर्वप्रथम चारों किनारों की सिलाई की जाती है। फिर रनिंग स्टिच से चारखाने बनाते हैं। प्रत्येक घर में तोता. मोर, चिंड़ियाँ, हाथी, फूल, पत्तियाँ आदि स्टिच से बनाई
जाती है।


Q47. रोग प्रतिरक्षण सारणी बताइए।

उत्तर ⇒ रोग प्रतिरक्षण सारणी (Immunization schedule) के अनुसार कौन कौन से टीके कब लगवाये जाते हैं, उनका विवरण निम्न प्रकार हैं

कबक्याक्यों
16 से 36 सप्ताहटी ० टी ० के दो टीकेगर्भवती महिला को लगाए जाते
हैं। इससे माँ और नवजात शिशु
को टेटनस से बचाव होता है।
3 से 9 महीने के
बीच
एक महीने के अंतर पर डी ०
पी ० टी ० के तीन टीके और
पोलियो की तीन खुराके देनी
चाहिए
गलघोंटू (डिप्थीरिया), काली खाँसी
(कुकुर खाँसी, टेटनस और
पोलियो से बच्चे का बचाव।
0 से एक महीने
के बीच
बी ० सी ० जी ० टीकातपेदिक (T.B.) से बचाव के लिए
9 से 12 महीने
के बीच
खसरे का एक टीकाखसरे से बच्चे का बचावा
18 से 24 महीने
के बीच
डी ० पी ० टी ० और पोलियो की
एक-एक बूस्टर खुराक
गलघोंटू (डिप्थीरिया), काली खाँसी (कुकुर खाँसी) और टेटनस से बच्चे का बचावा
15 माहएम ० एम ० आरखसरा, कनफेड, रूबैला सेबचावा
5 से 6 वर्ष के
बीच
टाइफाइड और डी ० पी ० टी ० के दो बूस्टर टीकेगलघोंटू (डिप्थीरिया), टिटनेस और ययफाइड बुखार से बच्चे काबचावा
10 वर्षटी० टी० और टायफाइड के दो टीकेटिटनेस और टायफाइड से बचाव।
16 वर्षटी ० टी ० और टायफाइड के दो टीकेटिटनेस और टायफाइड से बचाव।

Q48. शरीर में जल का क्या कार्य है? (What is the function of water in the body?)

उत्तर ⇒ शरीर में जल का निम्नलिखित कार्य है

(i) शरीर का निर्माण कार्य शरीर के परे भार का.56% भाग जल का होता है। गर्द में 83%, रक्त में 85%, मस्तिष्क में 79%, मांसपेशियाँ में 72%, जिगर में 70% तथा अस्थियाँ में 25% जल होता है।
(ii) तापक्रम नियंत्रक के रूप में जल शरीर के तापक्रम को नियंत्रित रखता है।
(iii) घोलक के रूप में यही माध्यम है जिससे पोषक तत्त्वों को कोषों तक ले जाया जाता है तथा चयापचय के निरर्थक पदार्थों को निष्काषित किया जाता है। पाचन क्रिया में जल का प्रयोग होता है। मूत्र में 96% जल होता है। मल-विसर्जन में इसकी आवश्यकता होती है। इसकी कमी से कब्जियत होती है।
(iv) स्नेहक कार्य — यह शरीर के अस्थियों के जोड़ों में होने वाले रगड से संधियों के चारों तरफ थैलीनुमा ऊतक में यह उपस्थित होता है. जिस संधियाँ जकड़ जाती हैं।
(v) शरीर के निरूपयोगी पदार्थों को बाहर निकालना — शरीर के विषैले पद तथा पसीने द्वारा यह बाहर निकालने में सहायक होता है।
(vi) नाजुक अंगों की सुरक्षा तथा पोषक तत्त्वों का हस्तांतरण करना यह पोषक तो एक स्थान से दूसरे स्थान पहुँचाता है। साथ ही नाजुक अंगों का सुरक्षा भी करता है।


Q49. खाद पदार्थों के मानक प्रमाण चीन के नाम उदाहरण सहित लिखें

मानक प्रमाण चिह्नों के नामउदाहरण
1.एफ ० पी ० ओ ० (Fruit Product Order)संरक्षित फल, सब्जियाँ, फलों के रस, फलों के पेय, स्कवैश, जैम, जैली, सूखे फल,शरबत, कृत्रिम सिरका, अचार, सीरप आदि।
2.आई ० एस ० आई ० (I.S.I.).(शिशु दुग्ध आहार, पाउडर दूध, कोको
पाउडर, आइसक्रीम, सेक्रीन, बिस्कुट, बेकिंग
पाउडर, नमक, बेसन, पनीर, बीयर, रम, कस्टर्ड
पाउडर, विद्युत-पंखे, इस्तिरी, चूल्हा, केतली,
स्विच मिक्सी, प्रेशर कुकर एवं गैस चूल्हा
आदि)
कृषि एवं खाद्य, रसायन, सिविल इंजीनियरींग,
चिकित्सा उपकरण, इलेक्ट्रोनिकी एवं दूर
संचार, विद्युत तकनीकी, जहाजरानी भारवहन,
पेट्रोलियम, कोयला, यांत्रिक इंजी ० संरचना
और धातु एवं वस्त्रादि।
3.एगमार्क (AGMARK)घी, मक्खन, खाद्य तेल, शहद, दालें, मसालें,
आटा, बेसन आदि

Q50. मिलावट से आप क्या समझते हैं? किन्हीं पाँच खाद्य पदार्थों में होने वाली . मिलावट का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ खाद्य पदार्थों में कोई मिलता-जुला पदार्थ मिलाने अथवा उसमें से कोई तत्त्व निकालने या उसमें कोई हानिकारक तत्त्व मिलाने से खाद्य पदार्थों की गुणवता में परिवर्तन लाने को मिलावट कहते हैं। दुकानदार अधिक लाभ कमाने के लिए मिलावट करते हैं।

पाँच खाद्य पदार्थों में होने वाले मिलावट निम्न हैं

1. अनाज — अनाज में मिट्टी या कंकड़ पत्थर मिलाया जाता है। गेहूँ में सस्ते अनाज जैसे— जौ आदि मिलाया जाता है। अच्छे आनाज में धूल लगे अनाज का मिश्रण या कटे टूटे दानों का मिश्रण किया जाता है।
2. चीनी — चीनी में विषैले पदार्थ जेसे ऐकीन या केलमेट मिलाकर खाद्य को अधिक मिठा कर दिया जाता है। फलों में सेक्रीन के टीके लगा दिए जाते हैं ताकि ये अधिक मीठे लगे। इसका स्वास्थ पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
3. दूध — दूध से मलाई निकालकर और पानी तथा अरारोट का मिश्रण किया जाता है जिससे पानी मिलाने पर भी दूध गाढ़ा दिखाई दे। भिन्न-भिन्न किस्म के दूध का भी मिश्रण किया जाता है।
4. चाय — चाय पत्ति में हल्का किस्म की पत्तियाँ काम में लाई गयी पत्तियाँ, लकड़ी का बुरादा, चमड़े की कतरन तथा मिट्टी का मिश्रण किया जाता है।
5. पिसी मिर्च — पिसी मिर्च में गेरू रंग, लकड़ी का लाल रंगा बुरादा चिरनी पाउडर सुखे बेरों के छिलकों का बुरादा, ईंट का चूर्ण आदि मिलाया जाता है।


Q51. धुलाई की विभिन्न विधियों के बारे में लिखें।

उत्तर ⇒ घरेलू प्रयोग में तथा सभी पारिवारिक सदस्यों के परिधानों में तरह-तरह के वस्त्र प्रयोग में आते हैं। सूती, ऊनी, रेशमी, लिनन, रेयन और रासायनिक वस्त्र तथा मिश्रण से बने वस्त्र भी रहते हैं। धुलाई की उचित विधि के प्रयोग से वस्त्रों का सौन्दर्य स्थायी और टिकाऊ
होता है, साथ ही कार्यक्षमता भी बढ़ती है।

कपड़े धोने की विधियाँ

(i) रगड़कर-रगड़कर केवल उन्हीं वस्त्रों को स्वच्छ किया जा सकता है जो मजबूत और मोटे होते हैं। रगड़ क्रिया को विधिपूर्वक करने के कई तरीके हैं। वस्त्र के अनुरूप तरीके का प्रयोग करना चाहिए।

(a) रगड़ने की क्रिया हाथों से घिसकर रगड़ने का काम हाथों से भी किया जा सकता है। . हाथों से उन्हीं कपड़ों को रगड़ा जा सकता है जो हाथों में आ सके अर्थात् छोटे कपड़े। (b) रगड़ने की क्रिया मार्जक ब्रश द्वारा कुछ बड़े वस्त्रों को जो कुछ मोटे और मजबूत भी होते हैं, ब्रश से मार्जन के द्वारा गंदगी से मुक्त किया जाता है।
(c) रगड़ने की क्रिया घिसने और मार्जन द्वारा–मजबूत रचना के कपड़ों पर ही इस विधि का प्रयोग किया जा सकता है।

(ii) हलका दबाव डालकर हलका दबाव डालकर धोने की क्रिया उन वस्त्रों के लिए अच्छी रहती हैं। जिनके घिसाई और रगड़ाई से क्षतिग्रस्त हो जाने का शंका रहती है। हल्के, कोमल तथा सूक्ष्म रचना के वस्त्रों को इस विधि से धोया जाता है।
(iii) सक्शन विधि का प्रयोग-सक्शन विधि का प्रयोग भारी कपड़ों को धोने के लिए किया जाता है। बड़े कपड़ों को हाथों से गूंथकर तथा निपीड़न करके धोना कठिन होता है। जो वस्त्र रगड़कर धोने से खराब हो सकते हैं जिन्हें गूंथने में हाथ थक जा सकते हैं और वस्त्र
भी साफ नहीं होता है उन्हें सक्शन विधि की सहायता से स्वच्छ किया जाता है।
(iv) मशीन से धुलाई करना-वस्त्रों को मशीन से भी धोया जाता है। धुलाई मशीन कई प्रकार की मिलती है, कार्य प्रणाली के आधार पर ये तीन टाइप की होती हैं सिलेंडर टाइप. वैक्यूम कप टाइप और टेजीटेटर टाइप। मशीन की धुलाई तभी सार्थक होती है जब
अधिक वस्त्रों को धोना पड़ता है और समय कम रहता है।


Q53. भारत में खुले में शौच समस्या का समाधान क्यों मुश्किल है? [2018AJ

उत्तर ⇒ भारत में शौच समस्या का समाधान निम्न कारणों से मुश्किल है

(1) शौचालय की खुबियों से अनभिज्ञता के कारण भारत के लोग शौच की समस्या से ग्रस्त हैं।
(2) भारत के लोग पुरानी दिनचर्या को छोड़ने से इंकार के कारण भी शौच की समस्या है।
(3) रूढ़िवादी परम्पराओं के कारण भी शौच की समस्या है। लोग अपनी आदतों को बदलना नहीं चाहते।
(4) “खुले में शौच करने के कई फायदे हैं” का समर्थन करना भी इसका कारण है।
(5) भारत गाँवों का देश है। गाँवों में लोग अशिक्षित, गरीब तथा अज्ञानता के कारण सरकार द्वारा दी गयी शौचालय निर्माण सहायता की जानकारी की कमी या उससे अंजान रहते


Q54. व्यय को प्रभावित करने वाले तत्त्वों का विवरण दें।

उत्तर ⇒ व्यय को प्रभावित करने वाले तत्त्व निम्नलिखित हैं —

(i) परिवार ढाँचा—हमारे देश में गाँवों में सयुक्त परिवार व्यवस्था तथा शहरों में एकांकी परिवार व्यवस्था है। संयुक्त परिवार में कई मदों पर संयुक्त व्यय किए जाते हैं। जैसे मकान किराया, भोजन, बिजली तथा नौकर दाई आदि। इसलिए प्रत्येक सदस्य पर आर्थिक बोझ
कम होता है। एकांकी परिवार को इन मदों पर शत-प्रतिशत व्यय करना पड़ेगा और उसे कम बचत होगी।
(ii) परिवार के सदस्यों की संख्या एक परिवार में यदि कई व्यक्ति कमानेवाले हों तो वहाँ अधिक आमदनी होने के कारण शिक्षा, मनोरंजन, खेलकूद तथा विलासिता पर अधिक व्यय होगा। एकांकी परिवार में ऐसा संभव नहीं है।
(iii) व्यक्ति का पेशा–व्यक्ति का पेशा भी व्यय को प्रभावित करता है। यदि व्यक्ति नौकरी पेशावाला हो तो उसका रहन-सहन का स्तर उच्च रखना पड़ता है। वहीं मजदूर वर्ग के लोग अपने रहन-सहन पर कम व्यय करते हैं।
(iv) सामाजिक एवं धार्मिक परम्पराएँ—प्रत्येक समाज में कुछ ऐसे आयोजन होते हैं जिन पर अन्य मदों पर कटौती कर अधिक खर्च करना पड़ता है। जैसे—छट्ठी, विवाह, गृह प्रवेश, श्राद्ध, जन्मदिन, दिवाली, दशहरा, होली, ईद, बकरीद, क्रिसमस, वैशाखी, ओणम आदि पर लोगों को अधिक व्यय करना पड़ता है।
(v) निवास स्थान एवं भौगोलिक स्थिति–गाँवों तथा कस्बों में रहने वाले लोगों का रहन-सहन, नगरों में बसने वाले लोगों की अपेक्षा निम्न स्तर का होता है। यदि निवास कार्यस्थल से बहुत दूर हो तो वहाँ तक यातायात से पहुँचने में भी अधिक खर्च करना पड़ता है।
(vi) परिवार के मुखिया की विवेकशीलता-परिवार का मुखिया विवेकशील है तो यह अच्छी तरह समझता है कि कब, किस मद में और कितना ख़र्च किया जाए ताकि परिवार के सभी सदस्यों को अधिकतम सुख-संतोष प्राप्त हो सके।


Q55. जल प्रदूषण से आप क्या समझते हैं? जल को शुद्ध करने की विधि का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ जल में अवांछित पदार्थों का मिश्रण जल प्रदूषण कहलाता है। शुद्ध जल प्राप्त करने के तरीके या विधियाँ

(i) घरेलू विधि घरेलू तौर पर पानी को शुद्ध किया जाता है जैसे-कपड़े से छानना, उबालना, विशेष छन्नियों का प्रयोग करके किया जाता है।
(ii) रासायनिक विधि रासायनिक विधि से जल को शुद्ध करने के लिए क्लोरीन, पोटासियम परमैंगनेट, कॉपर सल्फेट, बुझा हुआ चुना इत्यादि का प्रयोग किया जाता है। यांत्रिक विधि-जल को साफ करने के लिए यह विधि सबसे प्रचलित हैं। इस विधि में जल शुद्ध करने के लिए फिल्टर, वाटर प्यूरिफायर, आर० ओ० आदि का प्रयोग किया जाता है।


inter Board Exam 2024 Question Answer

 1.Hindi 100 Marks ( हिंदी )
 2.English 100 Marks ( अंग्रेज़ी )
 3.PHYSICS ( भौतिक विज्ञान )
 4.CHEMISTRY ( रसायन विज्ञान )
 5.BIOLOGY ( जीवविज्ञान )
 6.MATHEMATICS ( गणित )
 7.GEOGRAPHY ( भूगोल )
 8.HISTORY ( इतिहास )
 9.ECONOMICS ( अर्थशास्त्र )
 10.HOME SCIENCE ( गृह विज्ञान )
 11.SANSKRIT ( संस्कृत )
 12.SOCIOLOGY ( समाज शास्‍त्र )
 13.POLITICAL SCIENCE ( राजनीति विज्ञान )
 14.PHILOSOPHY ( दर्शन शास्‍त्र )
15.PSYCHOLOGY ( मनोविज्ञान )
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