नाखून क्यों बढ़ते हैं ( गोधूलि भाग-2 गध खंड ) Subjective Question 2024 || Nakhun Kyon Badhte hai Subjective Question Answer 2024

कक्षा 10 हिंदी गोधूलि भाग 2 पाठ 4 नाखून क्यों बढ़ते हैं नलिन विलोचन शर्मा के द्वारा लिखा गया है। नाखून क्यों बढ़ते हैं। क्लास 10th यह बहुत ही महत्वपूर्ण Subjective Question Paper है। अगर आप नाखून क्यों बढ़ते हैं। Objective Question Paper को पढ़ना चाहते हैं। तो हिंदी गोधूलि भाग 2 का ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर नीचे दिया गया है। जिसे पढ़कर आप अपने मैट्रिक परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। ( क्लास 10th Hindi Objective & Subjective Question Answer 2024 )

यहां पर बिहार बोर्ड कक्षा 10 हिंदी का नाखून क्यों बढ़ते हैं लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर दिया हुआ है जो मैट्रिक परीक्षा 2024 के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है यह प्रश्न उत्तर आपके आने वाले बोर्ड परीक्षा 2024 के लिए देखते हुए तैयार किया गया है इसलिए नाखून क्यों बढ़ते हैं पाठ का लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर बहुत ही महत्वपूर्ण है

नाखून क्यों बढ़ते हैं?  ( लघु उत्तरीय प्रश्न )

हिंदी गोधूलि भाग 2 नाखून क्यों बढ़ते हैं Subjective Question Paper

1Q. नाखून बढ़ने का प्रश्न लेखक के सामने कैसे उपस्थित हुआ ?

Ans :- एक दिन लेखक की छोटी लडकी ने उनसे अचानक पूछ दिया कि आदमा क नाखून क्या बढ़ते हैं? इस प्रश्न का उत्तर के लिए लेखक पहले से तैयार नहीं था। परन्तु प्रश्न का उत्तर देना जरूरी था। इसी चिंतन प्रक्रिया में निबंध अस्तित्व में आया।


2Q. लेखकद्वारा नाखूनों को अस्त्र के रूप में देखना कहाँ तक संगत है।

Ans :- जब मनुष्य के पास हथियार नहीं थे तो वह नाखूनों से अस्त्रं का काम लेता रहा होगा। मनुष्य अपने बच्चों को नाखून नष्ट करने पर डाँटता रहा होगा। यह तर्क संगत प्रतीत होता है।


3Q. लेखक क्यों पूछता है कि मनुष्य किस ओर बढ़ रहा है, पशुता की ओर या मनुष्यता की ओर?

Ans :- नाखून क्यों बढ़ते हैं? यह हमारी पशुता के अवशेष हैं। अस्त्र-शस्त्र क्यों बढ़ रहे हैं? ये हमारी पशुता की निशानी है। लेखक इसलिए पूछता है कि मनुष्य किस ओर बढ़ रहा है? स्पष्ट है। वह पशुता की ओर ही बढ़ रहा है। वह चाहता जरूर है, कि वह मनुष्यता की ओर बढ़े। आज मनुष्य अस्त्र-शस्त्र का जखीरा इकट्ठा किए जा रहा है। यह तो पशुता की ही निशानी कही जाएगी।


4Q. बढ़ते नाखूनों की प्रकृति क्या है?

Ans :- बढ़ते नाखूनों की प्रकृति है कि वह नाखून को जिलाए जा रही है। मनुष्य उसे काटे जा रहा है।


5Q. बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को क्या याद दिलाती है?

Ans :- बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को याद दिलाती है कि लाख वर्ष पहले मनुष्य नखों और दाँतों पर निर्भर पशुवत जीव था। आज भी हमारी पशुता नष्ट नहीं हुई है। पशुता मनुष्य की आदिम प्रवृत्ति है।


6Q. लेखक के अनुसार सफलता और चरितार्थता क्या है ?

Ans :- लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार मनुष्य मरणास्त्रों के संचयन से, बाह्य उपकरणों के बाहुल्य से उस वस्तु को पा लेना सफलता है, जबकि चरितार्थ लेखक के अनुसार मनुष्य के प्रेम में है, मैत्री में है, त्याग में है, अपने को सबके मंगल के लिए नि:शेष भाव से दे देने में है।


कक्षा 10th हिंदी गोधूलि भाग 2 नाखून क्यों बढ़ते हैं Subjective Question

7Q. लेखक की दृष्टि में हमारी संस्कृति की बड़ी भारी विशेषता क्या है ? स्पष्ट कीजिए।

Ans :- लेखक की दृष्टि में अपने-आप पर अपने-आप के द्वारा लगाया हुआ बंधन हमारी संस्कृति की बड़ी भारी विशेषता है । हम स्वाधीनता चाहते हैं । अंग्रेज अनधीनता चाहते हैं ।


8Q. स्वाधीनता शब्द की सार्थकता लेखक क्या बताता है ?

Ans :- दरअसल, स्वाधीनता का अर्थ है ‘स्व’ के अधीन होना। हमारे यहाँ, आजादी का अर्थ ‘इण्डिपेण्डेंस’ कहना उचित नहीं प्रतीत होता है। ‘इंडिपेण्डेंस’ का अर्थ सिर्फ अनधीनता है। आजादी का वास्तविक अर्थ किसी के अधीन नहीं होना है. बल्कि ‘स्व’ के अधीन होना। ‘स्व’ के बंधन बड़ा व्यापक है। इसीलिए हमारे यहाँ आजादी के लिए स्वतंत्रता, स्वराज्य और स्वाधीनता है। स्व के अधीन होना ही वास्तविक आजादी है।


9Q. मनुष्य की पूँछ की तरह उसके नाखून भी एक दिन अड़ जाएंगे। प्राणिशास्त्रियों के इस अनुमान से लेखक के मन में कैसी आशा जगती है?

Ans :- ऐसा कोई दिन आ सकता है, जबकि मनुष्य के नाखूनों का बढ़ना बंद हो जाएगा। प्राणिशास्त्रियों का ऐसा अनुमान है कि मनुष्य का अनावश्यक अंग उसी प्रकार झड़ जाएगा, जिस प्रकार उसकी पूँछ झड़ गयी है । उस दिन उसकी पशुता भी लुप्त हो जाएगी । शायद उस दिन वह मरणास्त्रों का प्रयोग भी बंद कर देगा। प्राणिशास्त्रियों के इस अनुमान में बड़ा दम है ।


कक्षा 10 गोधूलि भाग 2 हिंदी लघुत्तरीयप्रश्न एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर

10Q. देश की आजादी के लिए प्रयुक्त किन शब्दों की अर्थ मीमांसा लेखक करता है और लेखक के निष्कर्ष क्या हैं?

Ans :- आजादी के लिए स्वतंत्रता, स्वराज्य और स्वाधीनता इत्यादि शब्दों की अर्थ मीमांसा लेखक करता है । वह ‘इन्डिपेन्डेन्स’ एवं ‘सेल्फ इन्डिपेन्डेन्स’ शब्द का भी प्रयोग करता है । इन शब्दों में स्व का बन्धन है । भारतीय चित्र ‘अधीनता के रूप में न सोचकर ‘स्वाधीनता’ के रूप में सोचता है।


11Q. लेखक ने किस प्रसंग में कहा है कि बंदरिया मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती लेखक का अभिप्राय स्पष्ट करें।

Ans :- पुराने से चिपटे रहने में बुद्धिमता नहीं है । पुराने का ‘मोह’ सब समय वांछनीय ही नहीं होता। इसीलिए लेखक कहता है कि मरे बच्चे को गोद दबाए रहने वाली ‘बंदरिया’ मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती । सब पुराने अच्छे नहीं होते। सब नए खराब ही नहीं होते । हम स्वाधीनता चाहते हैं, अनधीनता नहीं। यही है प्रसंग


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12Q. लेखक ने बढे शब्द का प्रयोग किसके लिए किया है? बढेको क्यों गोली मार दी गयी?

Ans :- बूढ़े शब्द का प्रयोग महात्मा गाँधी के लिए किया गया है। उन्होंने आन्तरिक गुण को विकसित करने को ही असली प्रगति कहा। बाहरी प्रगति वास्तविक विकास नहीं है। उस बूढ़े के इस कथन को वैसे लोग नहीं समझ पाए,जो बाहरी माव को सनकल मानते हैं। दन लोगों ने नासमझवश बढे को गोली मार दी।


13Q. नाखून क्यों बढ़ते हैं’ का सारांश प्रस्तुत करें।

Ans :- आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने हिन्दी का एक उत्तम ललित निबंध ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं लिखा है। “प्रस्तुत निबंध में निबंधकार का मानववादी दृष्टिकोण प्रकट होता । इस ललित निबंध में लेखक ने बार-बार काटे जाने पर बढ़ जानेवाले नाखूनों के बहाने अत्यंत सहजशैली में सभ्यता और संस्कृति की विकास-गाथा उद्घाटित कर दिखायी है। एक ओर नाखूनों का बढ़ना मनुष्य की आदिम पाशविक वृत्ति और संघर्ष चेतना का प्रमाण है तो दूसरी ओर उन्हें बार-बार काटते रहना और अलंकृत करते रहना मनुष्य के सौंदर्यबोध और सांस्कृतिक चेतना को भी निरूपित करता है।”


14Q. सकुमार विनोदों के लिए नाखून को उपयोग में लाना मनुष्य ने कैसे शुरू किया? लेखक ने इस संबंध में क्या बताया है?

Ans :- कुछ हजार साल पहले मनुष्य ने नाखून को सुकुमार विनोदों के लिए उपयोग में लाना शुरू किया था। वात्स्यायन के काम सूत्र से पता चलता है कि आज से दो हजार वर्ष पहले का भारतवासी नाखूनों को जम के सँवारता था। उनके काटने की कला काफी मनोरंजक बताई गई है। त्रिकोण, वर्तुलाकार, चंद्रकार, दंतल आदि विविध आकतिओं के नाखून उन दिनों विलासी नागरिकों के न जाने किस काम आया करते थे। उनको सिक्थक (मोम) और अलक्तक (आलता) से यत्नपूर्वक रगड़कर लाल और चिकना बनाया जाता था। गौड़ देश के लोग उन दिनों बड़े-बड़े नखों को पसंद करते थे और दक्षिणात्य लोग छोटे नखों को। अपनी-अपनी रुचि है, देश की भी और काल की भी। लेकिन समस्त अधोगामिनी वृत्तियों को और नीचे खींचनेवाली वस्तुओं को भारतवर्ष ने मनुष्योचित बनाया है।


15Q. निबंध में लेखक ने किस बूढ़े का जिक्र किया है? लेखक की ‘दृष्टि में बूढ़े के कथनों की सार्थकता क्या है?

Ans :- लेखक ने एक बूढ़े का जिक्र किया है। वह और कोई नहीं हमारी आजादी के नायक महात्मा गाँधी हैं। मनुष्य को सुख कैसे मिलेगा? महात्मा गाँधी ने कहा बाहर नहीं, भीतर की ओर देखो। हिंसा को मन से दूर करो, मिथ्या को हटाओ, क्रोध और द्वेष को दूर करो, लोक के लिए कष्ट सहो, आराम की बात मत सोचो, प्रेम की बात सोचो आत्म-तोषण की बात सोचो, काम करने की बात सोचो। गाँधी ने कहा प्रेम ही बड़ी चीज है क्योंकि वह हमारे भीतर है। उच्छृखलता पशु की प्रवृत्ति है। ‘स्व’ का बंधन मनष्य का स्वभाव है। गाँधीजी की बातों में वास्तविक चरितार्थता छिपी थी।

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