Class 12 Home Science ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर ) 2022 ( 15 Marks ) | PART – 1

B.S.E.B इंटर बोर्ड परीक्षा 2022 के लिए यहां पर गृह विज्ञान का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर दिया गया है। जो आपके इंटर बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। तथा दोस्तों कक्षा 12 गृह विज्ञान का लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर भी दिया गया है। यह सभी प्रश्न बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए शुरू से अंत तक जरूर देखें।


Class 12 Home Science ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर ) 2022 ( 15 Marks ) | PART – 1

Q1. गृह विज्ञान का स्वरोजगार के लिए क्या-क्या उपयोग है?

उत्तर ⇒ गृह विज्ञान का स्वरोजगार के लिए निम्नलिखित उपयोग हैं

(i) प्रिंटिंग खोलकर ⇒ गृह विज्ञान में सिखाए गए सिद्धांतों, नियमों तथा विधियों का प्रयोग करने पर ब्लॉक-प्रिंटिंग तथा बंधेज खोलकर आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
(ii) शिशु ⇒ गृह (क्रेच) खोलकर-शिशु-गृह खोलने की विधि, आवश्यक साज-सामान तथा कार्यक्रमों की जानकारी होने से शिशु-गृह खोला जा सकता है।
(iii) साबुन तथा अपमार्जक का निर्माण कर ⇒ महिलाएँ व्यवस्थित तथा बुद्धिपूर्ण ढंग से संगठित होकर यह कार्य कर धनोपार्जन कर सकती हैं।
(iv) संरक्षण संबंधी व्यवसाय करके ⇒ महिलाएँ जैम, जेली, अचार, मुरब्बे आदि बनाकर तथा उसके डिब्बाबंदी कर बेचकर आर्थिक स्थिति सुधार कर धनोपार्जन कर सकती हैं इसके अतिरिक्त पापड़, बड़ियाँ आदि बनाकर उसे पैक कर बेच सकती हैं।
(v) वस्त्र सिलाई (बुटीक) करके ⇒ आधुनिकतम वस्त्रों की डिजाइनिंग की जानकारी होने से विभिन्न प्रकार के वस्त्रों की सिलाई कर धनोपार्जन कर सकती हैं। साथ ही कढ़ाई कर, स्वेटर बुनाई कर, पुस्तकों में जिल्द बाँधकर, कागज के फूल-पत्ती बनाकर, कपड़ों पर विभिन्न प्रकार रंगाई कर धन कमा सकती हैं।
(vi) ड्राइंग तथा ड्राइक्लीनिंग खोलकर ⇒ महिलाएँ गृह विज्ञान अध्ययन कर विभिन्न प्रकार के कपड़ों की धुलाई के साथ-साथ सूखी धुलाई करके धनोपार्जन कर सकती हैं।
(vii) प्रशिक्षण कक्षाएँ चलाकर ⇒ गृह विज्ञान के उपविषयों का पर्याप्त ज्ञान प्राप्त कर महिलाएँ प्रशिक्षण कक्षाएँ खोलकर तथा उसे कुशलतापूर्वक चला कर धनोपार्जन करती हैं, जैसे—कुकरी कक्षाएँ, स्टिचिंग कक्षाएँ, संरक्षण तथा डिब्बाबंदी कक्षाएँ, साथ ही
सिलाई कक्षाएँ आदि।
(viii) लघु उद्योग स्थापित कर ⇒ गृह विज्ञान के अध्ययन द्वारा महिलाएँ भी लघु उद्योग स्थापित कर धनोपार्जन कर सकती हैं, जैसे—कपड़े बुनाई, दरी एवं कालीन बुनाई, मोमबत्ती बनाना आदि।


Q2. विकास के विभिन्न क्षेत्रों में गृह विज्ञान का क्या योगदान एवं उपयोगिताएँ हैं? वर्णन करें।

उत्तर ⇒ विकास के विभिन्न क्षेत्रों में गृह विज्ञान का योगदान निम्न हैं

(i) पारिवारिक स्तर के उत्थान में ⇒ गृह विज्ञान की शिक्षा प्राप्त लड़कियाँ जिन घरों में रहती है उन्हें अपने सुझावों द्वारा लाभान्वित करती हैं। गृह विज्ञान की छात्राएँ रेडियो एवं टी.वी. कार्यक्रमों के माध्यम से पत्र-पत्रिका लिखकर जन-जीवन का पारिवारिक स्तर ऊँचा उठाने में सहायता प्रदान करती है।
(ii) स्वास्थ्य के क्षेत्र में ⇒ गृह विज्ञान शिक्षा प्राप्त लड़कियाँ स्वयं के एवं परिवार के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहती है। स्वच्छता बच्चों को समय पर टीका लगवाना आदि कार्य कशलता से करती है।
(iii) पोषण के क्षेत्र में ⇒ गृह विज्ञान के अंतर्गत पोषण ज्ञान प्राप्त कर लड़कियाँ कम खर्च में प्रत्येक आयु वर्ग के लिए पोषक तत्वों से युक्त आहार आयोजन करती है।
(iv) रोजगार के क्षेत्र में ⇒ गृह विज्ञान स्नातक लड़कियाँ कृषि अनुसंधान, पशुपालन, डेयरी, प्रसार शिक्षा निदेशालय, शिक्षण संस्थानों, पाक कला, सिलाई, हस्त शिल्प एवं स्वयं प्रशिक्षण केन्द्र आरम्भ करके धन अर्जित कर सकती है एवं दूसरों को रोजगार दे सकती है।
(v) बाल शिक्षा एवं स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में ⇒ गृह विज्ञान शिक्षा प्राप्त लड़कियाँ बच्चों के पठन-पाठन में सहयोग देती है। ये लड़कियाँ स्त्रियों को शिक्षित कर एवं रोजगार के नये अवसर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है।


12th class Bihar board home science long question answer 2022

Q3. मासिक धर्म/माहवारी चक्र किसे कहते हैं? मासिक धर्म के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?

उत्तर ⇒ प्रत्येक स्त्री को प्रजनन काल में प्रति 26 से 28 दिनों के बाद गर्भाशय से रक्त तथा श्लेष्मा का स्राव होता है। यह स्राव 3 या 4 दिनों तक लगातार होता है। इसे ही मासिक धर्म, ऋतुस्राव, रजोधर्म कहते हैं। यह प्राय: 13-14 वर्ष से 45-50 वर्ष की आयु तक प्रत्येक माह में होता है परन्तु गर्भावस्था में यह नहीं होता है। दो पीरियड्स के बीच का नियमित समय मासिक चक्र कहलाता है। मासिक धर्म के समय निम्नलिखित काम करना चाहिए—योनि के आस-पास की उचित सफाई, हल्का व्यायाम, नैपकिन की नियमित/समयानुसार बदलाव, आराम करना, सही पौष्टिक भोजन करना आदि। मासिक धर्म के दौरान स्त्रियों को निम्नलिखित काम नहीं करने चाहिए—नैपकिन को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही, खाना छोड़ना, अत्यधिक शारीरिक श्रम से बचना, बहुत तंग कपड़े नहीं पहनना, भारी व्यायाम, असुरक्षित यौन संबंध आदि।


Q5. गृह प्रसव  एवं अस्पताल प्रसव का तुलनात्मक विवरण दें

गृह प्रसव अस्पताल प्रसव
1.गृह में प्रसव  करना कम खर्चीला होता है1. अस्पताल में प्रसव करने पर अधिक खर्चीला होता है
2.चिकित्सीय दृष्टि से घर पर प्रसव कराना और सुविधाजनक होता है2.चिकित्सीय दृष्टि से अस्पताल में प्रसव कराना उत्तम होता है 
3.अनौपचारिक वातावरण रहता है3.औपचारिक वातावरण रहता है
4.घर पर प्रसव कराने से बाहर ले जाने के लिए यातायात की समस्या नहीं रहती है4.अस्पताल में प्रसव कराने के लिए गर्भवती को प्रसव केंद्र ले जाने के लिए यातायात की समस्या हो सकती है
5.घर  पर प्रसव कराने से जच्चा और बच्चा के साथ अनहोनी होने की समस्या रहती है5.अस्पताल में प्रसव कराने से जच्चा और बच्चा के साथ  अनहोनी होने का खतरा कम हो जाता है

 


Q5. प्रसवोपरांत देखभाल के पहलू क्या है?

उत्तर ⇒ प्रसवोपरांत देखभाल के पहलू निम्नलिखित हैं

प्रसवोपरांत मात्ता की देखभाल

(1) भोजन ⇒ प्रसव के बाद प्रसूता को संतुलित आहार देना आवश्यक हो जाता है। प्रसूता के भोजन में गर्म, तरल, बलवर्द्धक, सुपाच्य होना चाहिए।
(2) विश्राम एवं नींद ⇒ प्रसव के बाद उसके गर्भ सम्बंधी अंगों में परिवर्तन आ जाता है। उसे स्वभाविक स्थिति में आने में काफी समय लगता है। इसलिए विश्राम करना जरूरी है। प्रसूता को प्रसव कष्ट एवं थकान के बाद अच्छी नींद आती है।
(3) स्वच्छता एवं स्नान ⇒ प्रसव बाद प्रसूता के जननांग पर सेनेटरी पैड लगा देना चाहिए। तेल मालिश के बाद प्रसता को गर्म पानी में तौलिया भिंगोकर उसके शरीर को पोंछ देना चाहिए।
(4) व्यायाम ⇒ प्रसव के बाद प्रसूता का शरीर बेडौल हो जाता है। उसे पूर्व स्थिति में लाने के लिए हल्का व्यायाम करना चाहिए।

प्रसवोपरांत नवजात की देखभाल

(1) स्तनपान माता का दूध बच्चों को अनेक रोगों से बचाता है इसलिए बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान कराना चाहिए।
(2) निंद्रा-स्वस्थ बच्चा 18-22 घंटा तक सोता रहता है। वह केवल भूख लगने तथा मल-मूत्र त्याग से उठता है।
(3) अंगों की सफाई बच्चे को प्रथम स्नान कराते समय उसके विभिन्न अंगों की सफाई . पर ध्यान देना आवश्यक है। जैसे-नाक, आँख, कान, गले की सफाई इत्यादि।

(4) टीकाकरण शिशु जन्म के कुछ घंटों के बाद B.C.G. का टीका लगा देना चाहिए।


Q6. गर्भवती महिलाओं के संतुलित आहार का आयोजन आप कैसे करेंगी? गर्भावस्था में मुख्यतः कौन-कौन से पौष्टिक तत्त्वों की आवश्यकता होती है? वर्णन करें।

उत्तर ⇒ गर्भवती महिलाओं के संतुलित आहार का आयोजन गर्भवती एवं भावी शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार का अधिक महत्त्व होता है। गर्भावस्था में भ्रूण निर्माण के कारण शरीर में तीव्र गति से कई परिवर्तन होते हैं उपापचय क्रियाएँ
तीव्र गति से होने लगती हैं जो पोषक तत्त्वों की आवश्यकता को बढ़ा देती हैं। . गर्भावस्था में प्रोटीन, कैल्सियम, फॉस्फोरस एवं लौह-लवण की अधिक आवश्यकता पड़ती है। जन्म के समय शिशु का भार 3.2 किलोग्राम होने के लिए उसके शरीर
में 500 ग्राम प्रोटीन, 30 ग्राम कैल्शियम, 14 ग्राम फॉस्फोरस, 0.4 ग्राम लौह लवण तथा अन्य विटामिनों की विविध मात्रा होनी चाहिए। गर्भकाल के सातवें, आठवें एवं नवें महीने में शिशु का विकास अत्यन्त तीव्र गति से होता है। वह माँ के रक्त से
प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह-लवण, विटामिन एवं अन्य खनिज लवण अधिक मात्रा में शोषित करता है। भ्रूण उन्हीं तीन अन्तिम महीनों में अपने वजन का % भाग पोषक तत्त्वों से प्राप्त करता है। गर्भावस्था में विभिन्न पोषक तत्त्वों की
आवश्यकताएँ निम्नलिखित होती हैं ऊर्जा, प्रोटीन, कैल्शियम, लौह-लवण, आयोडीन, विटामिन A, विटामिन B, विटामिन D


Q7. बाल्यावस्था में सामान्यत: कौन-कौन से रोग होते हैं? वर्णन करें।

उत्तर ⇒ बाल्यावस्था में सामान्यतः निम्नलिखित रोग होते हैं — हैजा, गलसुआ. अति खसरा, शीतला, पोलियों, सर्दी एवं खाँसी, कान दर्द, तथा कृमि रोग आदि।।

(i) हैजा ⇒ यह बेसिलस जीवाणु द्वारा फैलता है जिसे बिब्रिओं कोमा नाम से जाना जा है। यह संक्रमित जल, संक्रमित भोजन, दूध या पेय पदार्थ के कारण फैलता है गर्मी तथा बरसात के दिनों में अधिक होता है। इसमें रोगी को उल्टी,
पेट दर्द या अधिक लगना, निर्जलीकरण हो जाता है। इससे बचने के लिए रोगी को अधिक मात्रा में तरल पदार्थ देना चाहिए, रोगी को न व्यक्ति से अलग रखना चाहिए। जीवन रक्षक घोल का प्रयोग करना चाहिए, समय पर डॉक्टर से दिखाना चाहिए

(ii) गलसुआ (mumps) ⇒ यह एक संक्रामक रोग है जो सर्दियों में अधिक होता है। इस रोग में चेहरे पर सूजन आ जाती है। संक्रमित व्यक्ति के प्रत्यक्ष सम्पर्क तथा संक्रमित व्यक्ति के छीकने से रोग के विषाणुओं का संक्रमण हो
जाता है। इस रोग में मँह सखने लगते हैं, कान में दर्द का अनुभव होता, लार ग्रंथियाँ बढ़ जाती है, कानों व गालों पर सूजन आ जाती है। इस रोग से बचने के लिए रोगी का मुँह नमक के पानी से साफ करें गले में आराम लाने के लिए गरारे करें।

(iii) अतिसार (Diarrhoea) ⇒ इस संक्रमण के कारण पेट की आँतों की कार्य प्रणाली सामान्य नहीं रहती। यह प्रदूषित जल, संक्रमित दूध, थूक, संदूषित भोजन तथा अस्वच्छ वातावरण से फैलता है। इस रोग में शौच पतला पानी की तरह, पेट में दर्द, दस्त, निर्जलीकरण की स्थिति, माँसपेशियों में अकड़न रोगी की नाड़ी धीमी व कमजोर हो जाती है। इस रोग को रोकथाम के लिए ओ०आर०एस० का प्रयोग करे। इसमें अधिक जल तथा तरल का प्रयोग करे। खाद्य पदार्थों को मक्खियों से बचाना चाहिए तथा खाने की वस्तु को ढक कर रखना चाहिए। ताजे भोजन एवं पानी को उबालकर इस्तेमाल करना चाहिए।

(iv) खसरा- (Measles) ⇒ यह विषाणु जनित रोग है। यह रोग दूषित वाय के माध्यम से फैलता है। रोगी के प्रत्यक्ष सम्पर्क में आने तथा नाक एवं गले के स्राव के सम्पर्क द्वारा होता है। इस रोग में सर्दी एवं खाँसी, तीव्र ज्वर, शरीर में छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं। इस रोग से बचने के लिए रोगी के कमरे को साफ रखे, संक्रमित व्यक्ति से दूर रहे तथा पौष्टिक एवं संतुलित आहार दे। इसके अतिरिक्त बच्चों को शीतला, पोलियों, सर्दी एवं खाँसी, कान दर्द तथा कृमि रोग हो
जाते हैं इससे बचाव के उपाय का पालन करना चाहिए।


Bihar board class 12th home science ka question answer 2022

Q8. किशोरावस्था के लिए आहार आयोजन किस प्रकार करेंगी? एक आहार तालिका प्रस्तुत करें।

उत्तर ⇒ किशोरावस्था तीव्रगति से वृद्धि एवं विकास की अवस्था है। यह अवस्था 12 वष स वर्ष तक होती है। इस अवस्था में अधिक पोषक तत्त्वों की आवश्यकता होती है। किशोरावस्था * आहार आयोजन करते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए

(i) ऊर्जा, प्रोटीन, लौह तत्त्व एवं कैल्सियम पोषक तत्त्व अति आवश्यक होते हैं।
(ii) अत्यधिक नहीं खाना चाहिए तथा व्यायाम आवश्यक है।
(iii) पोषक तत्त्वों की आवश्यकता कैलोरी — 2060, प्रोटीन —63 ग्राम, वसा- 22 ग्राम, कैल्सियम 500 ग्राम तथा लौह तत्त्व-30 मि० ग्राम, विटामिन A,6 मिग्राम,
थायमीन — 121 मि०ग्रा० तथा विटामिन D-40 मिग्रा० होती है।

(iv) आहार आवश्यकता खाद्यान्न-350 ग्राम, दाल-70 ग्राम, हरी सब्जियाँ-150 ग्राम, अन्य सब्जियाँ-75 ग्राम, जड़ें या कंद-75 ग्राम, फल/दूध-150 ग्राम/200 ग्राम, वसा/तेल/शक्कर/गुड़-250 मि०ली०/50 ग्राम।

खाद्य-पदार्थमात्राएँ/अदद
(i) सुबहदूध,1 कप
 भरा हुआ पराठा
टमाटर चटनी2 चम्मच
टिफिन टमाटर सैंडविच,4
सेब तथा संतरा।
(ii) दोपहर 

 

सांभर1 कटोरी
उबले चावल,1 प्लेट 
मेथी आलू सब्जी    ¼ कटोरी
खीरा रायता1 कटोरी
(iii) शाम 
 
दूध शेक स्लाइस ब्रेड मक्खन सहित।1 ग्लास 

4

(iv) रात्रि
 
दाल,1 कटोरी
आलू-पालक सब्जी ,½ कटोरी
रोटी,4
सलाद, 1 प्लेट
 खीर या कस्टर्ड 1 कटोरी
(v) सोने के पहले बादाम – दुध 1 कप

Q9. आहार आयोजन के महत्त्व क्या हैं?

उत्तर ⇒ परिवार के सभी सदस्यों को स्वस्थ रखने के लिए आहार का आयोजन आवश्यक है। आहार आयोजन का महत्त्व निम्न कारणों से है

(i) श्रम, समय एवं ऊर्जा की बचत आहार आयोजन में आहार बनाने के लिए ही इसकी योजना बना ली जाती है। आवश्यकतानुसार यह आयोजन दैनिक, साप्ताहिक, अर्द्धमासिक तथा मासिक बनाया जा सकता है। इससे समय, श्रम तथा ऊर्जा की बचत होती है।

(ii) आहार में विविधता एवं आकर्षण आहार में सभी भोज्य वर्गों का समायोजन करने से आहार में विविधता तथा आकर्षण उत्पन्न होता है। साथ ही आहार पौष्टिक, संतलित तथा स्वादिष्ट हो जाता है।
(iii) बच्चों में अच्छी आदतों का विकास करना चूँकि आहार में सभी खाद्य वर्गों को शामिल किया जाता है। इससे बच्चों को सभी भोज्य पदार्थ खाने की आदत पड़ जाती है। इससे ऐसा नहीं होता कि बच्चा किसी विशेष भोज्य पदार्थ को ही पसंद करे तथा
अन्य को ना पसंद करे।
(iv) निर्धारित बजट में संतुलित एवं रुचिकर भोजन-आहार का आयोजन करते समय निर्धारित आय की राशि को परिवार की आहार आवश्यकताओं के लिए इस प्रकार वितरित किया जाता है। जिससे प्रत्येक व्यक्ति की रुचि तथा अरुचि का भी ध्यान रखा जाता है और प्रत्येक व्यक्ति को संतुलित आहार भी प्रदान किया जाता है। आहार आयोजन के बिना कोई भी व्यक्ति कभी भी आहार ले सकता है। परंतु व्यक्ति को पौष्टिक आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ नहीं हो सकता है। आहार आयोजन
के बिना परिवार की आय को आहार पर खर्च करने से बजट, भी असंतुलित हो जाता है।

inter Board Exam 2022 Question Answer

 1.Hindi 100 Marks ( हिंदी )
 2.English 100 Marks ( अंग्रेज़ी )
 3.PHYSICS ( भौतिक विज्ञान )
 4.CHEMISTRY ( रसायन विज्ञान )
 5.BIOLOGY ( जीवविज्ञान )
 6.MATHEMATICS ( गणित )
 7.GEOGRAPHY ( भूगोल )
 8.HISTORY ( इतिहास )
 9.ECONOMICS ( अर्थशास्त्र )
 10.HOME SCIENCE ( गृह विज्ञान )
 11.SANSKRIT ( संस्कृत )
 12.SOCIOLOGY ( समाज शास्‍त्र )
 13.POLITICAL SCIENCE ( राजनीति विज्ञान )
 14.PHILOSOPHY ( दर्शन शास्‍त्र )
15.PSYCHOLOGY ( मनोविज्ञान )
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