BSEB Class 12th History Subjective Question 2024 ( कक्षा 12 इतिहास लघु उत्तरीय प्रश्न ) 2024 | PART – 7

दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड कक्षा 12 के लिए इतिहास का अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर ( Bihar Board Class 12 History very short answer type questions 2024 ) दिया हुआ है तथा साथ में कक्षा 12 इतिहास का ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन भी ( Inter Board Exam 2024 History Question Answer ) दिया हुआ है अगर आप लोग इस बार इंटर बोर्ड परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो इन सभी प्रश्नों को ध्यान पूर्वक जरूर पढ़ें क्योंकि इन्हीं सब प्रश्न आपके इंटर बोर्ड परीक्षा 2024 में पूछे जा सकते हैं ,कक्षा 12 इतिहास के महत्वपूर्ण प्रश्न 2024 पीडीऍफ़ डाउनलोड

 


इतिहास ( लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर ) PART – 7

 

बिहार बोर्ड कक्षा 12 इतिहास का ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर 2022

Q125. स्थायी बंदोबस्त से आप क्या समझते हैं?

Ans :- स्थायी बंदोबस्त अंग्रेजी सरकार द्वारा लागू की गई भू राजस्व प्रणाली थी। इसे बंगाल में लार्ड कार्नवालिस द्वारा 22 मार्च, 1793 ई० को लागू किया गया था। इसमें कर वसूली का अधिकार स्थानीय जमींदार को दिया गया था। इसमें सरकार और किसानों के बीच जमींदार वर्ग लाया गया। यह व्यवस्था किसानों के शोषण का कारण बना।


Q126. झूम खेती के बारे में आप क्या जानते हैं?

Ans :- झूम खेती कृषि का एक आदिम तरीका है। इसमें पहले वृक्षों तथा वनस्पतियों को काटकर उन्हें जला दिया जाता है और साफ की गई भूमि को लकड़ी से जुताई कर बीज बो दिये जाते थे। फसल पूर्णतः प्रकृति पर निर्भर होती है। इसमें उत्पादन काफी कम होता है। इस प्रकार की खेती की परंपरा आदिवासियों में अधिक प्रचलित थी। अंग्रेजी सरकार ने वन कानून पास कर इसे समाप्त किया था।


Q127. संथालों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध विद्रोह क्यों किया?

Ans :- संथाल विद्रोह अंग्रेज अधिकारियों, जमींदारों, व्यापारियों तथा महाजनों और और अत्याचार का परिणाम था। व्यापारियों, महाजनों और साहूकार जिन्हें संथाल आदिवा” कहकर संबोधित करते थे, ये लोग संथालों के जंगलों पर परम्परागत अधिकार से वंचित क और उनके जमीन जायदाद छिन लिये। इस कार्य में महाजनों और साहूकारों को अंग्रेज अधिकार का संरक्षण प्राप्त था। इस प्रकार शोषण, अत्याचार से पीड़ित संथालों ने सिद्धू तथा कान्हु के नेतृत्व में 1855-56 में विद्रोह कर दिया।


Q128. दामिन-ए-कोह पर टिप्पणी लिखें।

Ans :- कंपनी सरकार ने संथालों को जंगल मुहालों में बसाने के लिए राजमहल की तलहटी में काफी बड़े इलाके को सीमांकित किया तथा इसे संथालों की भूमि घोषित कर दिया, इन्हें इसी इलाके के भीतर रहना था तथा हल चलाकर खेती करनी थी। इस सीमांकित स्थान को ही ‘दामिन-ए-कोह’ कहा जाता था। यह मैदानी और पहाड़ियों के मध्य की जगह थी जिसे संथालों को कृषि योग्य बनाना था।


Q129. दक्कन दंगा आयोग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

Ans :- दक्कन विद्रोह के कारणों की जाँच के लिए कम्पनी के अधिकारियों की माँग पर 1875 में दक्कन दंगा आयोग का गठन किया गया। आयोग द्वारा दक्कन विद्रोह के कारणों की जाँच के बाद तैयार रिपोर्ट ब्रिटिश पार्लियामेंट में 1878 में भेजी गयी। इस रिपोर्ट में रैयतों पर अत्याचार तथा उनमें असंतोष, रैयत वर्ग तथा ऋणदाताओं के बयानों, भू-राजस्व की दरें तथा अकाल और मंदी की स्थिति तथा जिला क्लेक्टरों द्वारा भेजी गई रिपोर्ट का संकलन है।


Q130. दक्कन विद्रोह पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

Ans :- दक्कन 1875 में पुना तथा अहमदाबाद के कुछ जिलों में किसानों ने साहूकारों के . अत्याचारों से तंग आकर साहूकारों के खिलाफ विद्रोह कर दिया जिसे इतिहास में दक्कन विद्रोह . के नाम से जाना जाता है। एक अनुमान के अनुसार 33 गाँव के लोगों ने विद्रोह किया था। इस विद्रोह में विद्रोहियों के निशाने पर थे मारवाड़ी तथा ब्राह्मण साहूकार। इस विद्रोह की विशेषता यह थी कि इसमें किसी की हत्या नहीं हुई विद्रोहियों का उद्देश्य केवल दस्तावेज को नष्ट करना था। –


Q131. पहाड़िया जनजाति पर टिप्पणी लिखें।

Ans :- पहाड़िया जनजाति राजमहल के इर्द-गिर्द रहते थे और वहीं जंगल की उपज से अपनी गुजर-बसर करते थे। ये झूम खेती करते थे अर्थात् जंगल के किसी छोटे से हिस्से की झाड़ियों को काटकर और घास-फूस को जलाकर जमीन-साफ कर लेते थे और राख की पोटाश से । उपजाऊ बनी जमीन पर खाने के लिए दालें और ज्वार-बाजरा उगा लेते थे। वर्षों तक उस जमीन पर खेती करते फिर उसे परती छोड़कर नये इलाके में चले जाते थे। उनका संपूर्ण जीवन यहा की पहाड़ियों में ही सिमटा हुआ था। वे बाहरी लोगों का विरोध करते और उस रास्ते से जानेवाला से पथकर वसुलते थे।


Q132. जोतदार पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

Ans :- जोतदार 18वीं सदी के अंत में उभरा हुआ वर्ग था वस्तुतः धनी कृषकों को जोतदार कहा जाता था जिसका विवरण फ्रांसिस बुकानन के सर्वे में हम पाते हैं। जोतदारों के पास जमाना क बड़े-बड़े रकबे होते थे जो कई हजार एकड़ में फैले होते थे और उनकी जमीनों पर उपज बटाईदार के माध्यम से की जाती थी। ये बंटाईदार खेती करके उपज का आधा भाग जोतदार देते थे। जोतदार गाँव में ही निवास करते थे तथा जमींदारों से अधिक प्रभावशाली होते थे कि गाँव के व्यक्तियों पर इनका सीधा नियंत्रण स्थापित था। जोतदार जमींदारों के निलाम की जमीन को खरीद लेते थे। इस प्रकार इनके पास जमीन की बड़ी-बड़ी रकबे थी और ये गाँव के स्तर पर प्रभावशाली व्यक्ति होते थे। कभी-कभी तो ये सरकार और जमींदारों के आदेश और निर्देश को नजर अंदाज कर देते थे।


Q133. जमींदार वर्ग के बारे में संक्षिप्त में टिप्पणी लिखें।

Ans :- आधुनिक समय में ब्रिटिश सरकार द्वारा जमींदारों के प्रति मैत्रीपूर्ण नीति अपनाई गयी। 1857 में तो कैनिंग द्वारा राजाओं और जमींदारों को ‘आँधी में तरंगरोधक’ की संज्ञा दी गई थी। ब्रिटिश शासकों द्वारा जमींदारों को बढ़ावा दिया जा रहा था क्योंकि जमींदार वर्ग अंग्रेज और रैयतों के बीच मध्यस्थ के रूप में थे। जमींदारों के बल पर ही सदर भारत में शोषण परक शिकंजा कस दिया था। जमींदारों के शोषण एवं ब्रिटिश सरकार की धनलोलूप नीतियों के चलते कृषकों को अपनी खेती से बेदखल होना पड़ा था। इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप ब्रिटिश भारत में अनेकानेक कृषक आंदोलन हुए। सिद्ध एवं कान्हू के नेतृत्व में 1855-56 ई० में संथाल विद्रोह हुआ जिसका क्रुरतापूर्वक दमन कर दिया गया। 1860 ई० में पबना एवं नदिया जिले के कृषकों द्वारा भारतीय इतिहास की सर्वप्रथम एवं महत्त्वपूर्ण कृषक हड़ताल हुए।


Q134. महालवाड़ी व्यवस्था पर टिप्पणी लिखें।

Ans :- भू-राजस्व की यह व्यवस्था अवध और मराठा अधिकृत क्षेत्रों में (1803-04) में लागू की गयी। यह जमींदारी व्यवस्था का संशोधित स्वरूप था। इस व्यवस्था में लगान महाल (गाँव या जागीर) के आधार पर तय किया गया था। लगान चुकाने की जिम्मेवारी समस्त महाल की थी। किसान का जमीन पर व्यक्तिगत अधिकार नहीं रहा, बल्कि सारी भूमि महाल के नियंत्रण में थी। इस व्यवस्था में मार्टिन वर्ड ने संशोधन करके इसे उत्तर-पश्चिमी प्रदेश में लागू किया। इस व्यवस्था में भी कृषकों का शोषण हुआ।


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Q135. रैयतवाड़ी व्यवस्था की विशेषताओं को लिखें।

Ans :-1820 ई० में अंग्रेजों द्वारा मद्रास प्रांत से एक नई भूराजस्व नीति के तहत रैयतवाडी व्यवस्था की शुरुआत की गई। इस व्यवस्था की खास बात यह थी कि सरकार ने किसानों (रैयतों) साथ साध भूराजस्व बंदोवस्त की शुरुआत की। इस व्यवस्था में किसान और सरकार के बीच पचालिया नहीं था। इस व्यवस्था को शुरू करने का श्रेय सर टॉमस रो को जाता है।


Q136. वीर कुंवर सिंह का एक संक्षिप्त परिचय दीजिये।

Ans :- वीर कुंवर सिंह जगदीशपुर जिला भोजपुर के जमींदार थे। इन्होंने 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन्होंने अंग्रेजों को कई बार पराजित किया था। 80 वर्ष की आयु में भी ये बाँह में गोली लगने के कारण अपनी एक हाथ काटकर गंगा मईया को अर्पित कर दिये थे। अंतिम समय तक जगदीशपुर वीर कुंवर सिंह के अधीन था। मृत्युपरांत ही अंग्रेज जगदीशपुर पर अधिकार कर पाये थे।


Q137. 1857 के विद्रोह के सामाजिक कारणों का उल्लेख करें।

Ans :- अंग्रेज भारतीयों से अपमानपूर्ण व्यवहार करते थे। कानून के समक्ष भी भारतीयों को नीचा समझा जाता था। अंग्रेजों द्वारा भारतीय रीति-रिवाजों पर किए जानेवाले आघात से भारतीयों
में असंतोष फैलने लगा। धर्मपरिवर्तित लोगों को सरकारी नौकरी देने तथा पैतृक संपति में अनि कार देने की नीति, सती प्रथा के उन्मूलन, विधवा विवाह को कानूनी मान्यता देने से भारतीयों के दिल में यह बात बैठ गयी की अंग्रेज उनकी परंपरा को नष्ट कर ईसाई धर्म का प्रचार करना चाहते हैं। अतः भारतीये अंग्रेजों को अपना शत्रु समझने लगे।


Q138. 1857 के विद्रोह के राजनीतिक कारणों का उल्लेख करें।

Ans :- 1757 से 1857 ई० के मध्य ईस्ट इंडिया कम्पनी ने छल-प्रपंच, कूटनीति और बल प्रयोग द्वारा लगभग समस्त भारत पर अधिकार कर लिया। देशी राजाओं को कंपनी की सत्ता स्वीकार करने को बाध्य किया गया। इससे राज्यों में असंतोष था। इस असंतोष को बढ़ाने में बेलेजली की सहायक संधि, डलहौजी की कुशासन के आधार पर राज्य हड़पने की नीति, गोद-निषेध की नीति, देशी राजाओं, नवाबों, ताल्लुकेदारों की जमींदारियाँ जब्त करने की नीति ने जलती अग्नि में घी डाला। पेशवा वाजीराव द्वितीय के दत्तकपुत्र नाना साहब की पेंशन बंद करने, मुगलों की सत्ता को समाप्त करने की योजना, झाँसी, नागपुर, सतारा, पंजाब, अवध के अधिग्रहण से देशी राजाओं और जमींदारों का एक वर्ग कंपनी शासन के विरुद्ध संगठित हो गया।


Q139. मुगल बादशाह बहादुरशाह का 1857 के विद्रोह में क्या योगदान था?

Ans :- 1857 के विद्रोह में मुगल बादशाह बहादुरशाह का महत्त्वपूर्ण योगदान था। यह विद्रोह उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा गया। यद्यपि वे कमजोर और वृद्ध थे तथापि उन्होंने विद्रोहियों का नेतृत्व संभाला। वे विद्रोहियों के शक्ति के प्रतीक थे। इसलिए विद्रोह की असफलता के बाद उन्हें महंगी कीमत चुकानी पड़ी। उन्हें गिरफ्तार करके रंगुन में निर्वासित कर दिया गया जहाँ उनकी मृत्यु हो गयी। उनके सामने ही उनके पुत्रों और पौत्रों की हत्या कर दी गयी। विद्रोह में भाग लेने के कारण मुगलों का शासन ही समाप्त कर दिया गया। इस प्रकार बहादुरशाह ने इस विद्रोह में भाग लेकर अपना सर्वस्व गँवा दिया।


Q140. 1857 की क्रांति के क्या परिणाम हुए?

Ans :-1857 की क्रांति के निम्न परिणाम हुए

(i) भारत की सत्ता ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया।
(ii) भारत में गवर्नर जनरल की जगह वायसराय की नियुक्ति होने लगी।
(iii) सामरिक महत्व के ठिकानों पर यूरोपीय सैनिकों की नियुक्ति होने लगी।
(iv) भारत में सामाजिक-धार्मिक सुधार की नीति को अंग्रेजों ने त्याग दिया।
अंग्रेजों ने भारत को हिन्दू मुस्लिम में बाँट कर फूट डालो और.शासन करो की नीति
अपनाई।


Q141. 1857 के विद्रोह के प्रभाव का वर्णन करें!

Ans :- 1857 के विद्रोह को अंग्रेजों ने क्रूरतापूर्वक दबा दिया परंतु इसके प्रभाव राजनैतिक, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन पर पड़ा। राजनैतिक रूप से भारत का शासन सीधे क्राउन के अधीन लाया गया। सामाजिक स्तर पर अंग्रेजों ने अपने सुधारवादी नीतियों का परित्याग कर फूट डालो और शासन करो की नीति अपनानी शुरू की। आर्थिक स्तर पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया की सत्ता खत्म होने से अंग्रेज पूँजीपतियों द्वारा भारत में बड़े पैमाने पर पूँजी लगाया तथा भारत का आर्थिक दोहन में और वृद्धि हो गई।


Q142. बेगम हजरत महल पर संक्षेप में टिप्पणी लिखें।

Ans :-बेगम हजरत महल वाजिद अली शाह की पत्नी थी। मिर्जा विरजीस कदर इनके पुत्र थे। कुशासन के आरोप में जब अंग्रेजों ने अवध को हड़प लिया और नवाब वाजिद अलीशाह
को कलकत्ता निर्वासित कर दिया गया। तब अवध के स्वदेशी सैनिक कमाण्डरों ने 13 वर्षीय विरजीद कादिर को अवध का ताज पहनाया और बेगम हजरत महल को संरक्षिका घोषित किया। इसके बाद बेगम ने अंग्रेजों से 1857 ई० में टक्कर लेने के लिए अवध के प्रमुख ताल्लुकदारों और जमींदारों को शाही फरमान जारी कर यद्ध के लिए संगठित रहने का आदेश दिया। इसके बाद बेगम लखनऊ में अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी। बाद में उसे नेपाल भागकर शरण लेनी पड़ी।


Q143. नाना साहल कौन थे?

Ans :- ये कानपुर के क्रांतिकारी दल के नेता थे तथा अंतिम पेशवा बाजीराव के दत्तक पुत्र . थे। वाजीराव के मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने नाना साहेब की पेंशन बंद कर दी थी। क्रुध होकर नाना साहेब ने अंग्रेज सैनिकों को कानपुर के किले में बंद कर दिया। अंग्रेज सेनापति व्हीलर ने जान बख्शने की शर्त पर आत्म समर्पण कर दिया परंतु जैसे ही वे नावों में सवार होकर गंगा पार करने लगे भारतीय सैनिकों ने 400 अंग्रेजों को गोलियों से भून डाला बाद में सेनापति नील और हैवलाम ने कानपुर पर अपना अधिकार जमा लिया तो नाना साहेब ने तात्या टोपे की सहायता से फिर से अधिकार कर लिया किन्तु 6 दिसम्बर, 1857 को कैम्पवेल ने नाना साहेब को परास्त कर दिया और वे निराश होकर नेपाल चले गये।


Q144. लार्ड डलहौजी की हड़प नीति पर टिप्पणी लिखें।

Ans :- 1857 के विद्रोह का प्रमुख कारण देशी रियासत को ईस्ट इंडिया कम्पनी के अधीन प्रदेशों में मिलाना था। लार्ड डलहौजी ने आदिकाल से चली आ रही गोद लेने की प्रथा को समाप्त कर दिया, जिससे वह उन रियासतों को कम्पनी के शासन में मिला सके, जिन शासकों के कोई संतान नहीं थी। झाँसी की रानी को स्पष्ट रूप से अपना उत्तराधिकारी गोद लेने से मना कर दिया गया था। डलहौजी की यह नीति हडप्प नीति के नाम से प्रसिद्ध है। उसने इस नीति के फलस्वरूप कई रियासतों को अपने नियंत्रण में लिया जैसे—सतारा, जैतपुर, झाँसी, नागपुर आदि।


कक्षा 12 इतिहास के महत्वपूर्ण प्रश्न 2022 बिहार बोर्ड

Q145. 1857 ई० के विद्रोह के सैनिक कारण क्या थे? “या”1857 ई० के विद्रोह का तात्कालिक कारण क्या था?

Ans :- 1857 ई० के विद्रोह का एक प्रमुख कारण सैनिकों में व्याप्त असंतोष था। सैनिकों का असंतोष ही विद्रोह का तात्कालिक कारण बना। भारतीय सैनिकों को ऊँचे पद, वेतन और अन्य सुविधाओं से वंचित रखा गया था। उन्हें इच्छानुसार कभी भी नौकरी से निकाला जा सकता था। लार्ड कैनिंग ने जेनरल सर्विस इनलिस्टमेंट एक्ट द्वारा भारतीय सैनिकों को समुद्र पार भेजने की व्यवस्था की। यह भारतीयों के धर्म के खिलाफ समझी जाती थी। इससे भारतीय सैनिकों के भावनाओं को ठेस पहुँची। 1857 ई० में सैनिकों को एनफील्ड राइफल दी गई। इसके कारतूस को दाँत से काटना पड़ता। यह अफवाह फैली की इसमें गाय और सअर की चर्बी मिली हुई है। इससे हिन्द और मस्लिम सानक.भड़क उठे। मार्च 1857 में वैरकपर छावनी में सिपाही मंगल पाण्डे ने अपने अधिकारी की हत्या कर दी। इसके साथ ही पूरे भारत में विद्रोह भड़क उठा।


Q146. यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों ने भारत में नगरीकरण को क्यों बढ़ावा दिया दो कारण बताइए।

Ans :- यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों ने भारत में नगरीकरण को बढ़ावा दिया इसके दो कारण निम्नलिखित हैं-

(i) इंग्लैंड में निर्मित वस्तुओं का एक व्यापक बाजार मिल सके।
(ii) भारत में शहरी आबादी का एक ऐसा वर्ग तैयार किया जा सके, जो पश्चिमी शिक्षा. रहन-सहन, संस्कृति का अनुकरण कर सके।


Q147. ‘धन निष्कासन’ से आप क्या समझते हैं?

Ans :- ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के परिणामस्वरूप भारत से बड़ी मात्रा में धन का निष्कासन हुआ। यह धन इंगलैंड विभिन्न रूपों में ले जाया गया। बंगाल में कंपनी शासन की स्थापना के पूर्व इंगलैण्ड का पर्याप्त धन व्यापार के माध्यम से भारत आता था, परन्तु 1757 ई० के पश्चात भारत से ही धन इंगलैंड जाने लगा। भारत से ले जाये गये धन के बदले भारत को कुछ नहीं मिला। यही ‘धन का निष्कासन’ था। भारतीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब यहाँ के विदेशी शासक नियमित रूप से धन अपने देश ले गये। यह धन व्यापार के माध्यम से तो जाता ही था कंपनी के कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, उपहार के रूप में भी भारत से पर्याप्त धन इंगलैंड ले जाया गया।


Q148. कृषि का वाणिज्यिकरण से आप क्या समझते हैं?

Ans :- कृषि का वाणिज्यिकरण का अर्थ होता था कृषि के लिए वैसे फसलों के उत्पादन पर जोर देना जो उद्योगों में कच्चा माल के रूप में प्रयोग होता है। अंग्रेजों ने भी भारतीय कृषि का वाणिज्यिकरण कर धान और गेहूँ की जगह कपास, नील, गन्ना, पटसन आदि फसलों के उत्पादन पर जोर दिया। इसमें उत्पादित वस्तुओं का मूल्य अंग्रेजी कंपनी अपने अनुसार तय करती थी। इससे भारत में बेरोजगारी, भूखमरी आदि समस्या उत्पन्न हुई।


Q149. कांग्रेस में उग्रवादियों की भूमिका का परीक्षण करें।

Ans :- 19वीं शताब्दी के अंतिम चरण और 20वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में उग्रवादी आन्दोलन का विकास हुआ। इस आन्दोलन का केन्द्र बंगाल था, यद्यपि भारत के अन्य भागों में यह आन्दोलन प्रभावशाली था। इस आन्दोलन में अधिकांश शिक्षित मध्यम वर्ग के युवा शामिल थे।
(i) महाराष्ट्र-उग्रवादी आन्दोलन का आरम्भ महाराष्ट्र से हुआ। 1896-97 में पुना में चापेकर बंधु ने व्यायाम मंडल की स्थापना की। इसके सदस्यों ने रैंड और एमहर्ट नामक दो अंग्रेजों की हत्या की। इसके लिए चापेकर बंधुओं को फांसी दे दी गयी।
(ii) बंगाल-बंगाल में उग्रवादी आन्दोलन सबसे व्यापक था। इनका मुख्य कारण बंगाल विभाजन से उत्पन्न आक्रोश एवं सरकारी दमन की प्रतिक्रिया थी। बंगाल में अनेक गुप्त क्रान्तिकारी समितियाँ स्थापित की गयी, जैसे-अनशीलन समिति, युगान्तर दल इत्यादि। अलीपुर षड्यंत्र केस’ में वारींद्र घोष को कालापानी और अनेकों को फाँसी की सजा दी गयी। अरविंद घोष इस मुकदमे से. बरी हो गये।
(iii) पंजाब व अन्य भाग पंजाब में अजीत सिंह ‘महिब्वाने वतन’ नामक क्रांतिकारी संस्था बनायी। लाला लाजपत राय और लाला हरदयाल क्रांतिकारी आन्दोलन से जुड़े हुये थे। लाला लाजपत राय को इसके लिए गिरफ्तार किया गया। . क्रांतिकारी आन्दोलन अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सके, लेकिन अपने त्याग, बलिदान और देश प्रेम की भावना से भारतीयों में एक नई आशा और उत्साह का सृजन किया। उनका प्रभाव
राष्ट्रीय आन्दोलन पर व्यापक रूप से पड़ा।


Q150.  1907 में काँग्रेस में विभाजन क्यों हुआ?

Ans :-काँग्रेस के अंदर उदारवादियों की नीतियों के विरुद्ध 1895 से असंतोष बढ़ने लगा था। अरविद घोष, तिलंक, लाजपत राय जैसे नेता काँग्रेस नेतत्व से अधिक प्रभावशाली नीतियों का माँग कर रहे थे। बनारस अधिवेशन (1905) के बाद गोखले काँग्रेस से अलग हो गये। 1905 में ही बंग-विभाजन के परिणामस्वरूप स्वदेशी और वायकाट के प्रश्न पर राष्ट्रवादियों (उदारवादियों) और उग्रवादियों में विरोध बढ़ता गया। फलतः 1906 में तिलक के स्थान पर दादाभाई नौरोजी को काँग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। उग्रवादियों के दबाव के कारण कलकता अधिवेशन (1906) में काँग्रेस नेतृत्व ने स्वराज्य, स्वदेशी, वॉयकॉट और राष्ट्रीय शिक्षा पर प्रस्ताव तो स्वीकार कर लिया, परंतु उसे लागु करने का कोई प्रयास नहीं किया। इससे उग्रवादियों का असंतोष बढ़ने लगा। इसने जलती अग्नि में घी का काम किया। 1907 के सुरत अधिवेशन के लिए लाला लाजपत राय के स्थान पर रास बिहारी घोष को काँग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। तिलक को बोलने नहीं दिया गया। सुरेन्द्र नाथ बनर्जी को उग्रवादियों ने अपमानित कर एवं अव्यवस्था फैलाकर अधिवेशन को भंग करवा
दिया। इस घटना के. बाद तिलक और उनके सहयोगी काँग्रेस से अलग हो गये। काँग्रेस पर उदारवादियों का पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया।

class 12th intermediate Arts Objective Question Paper 2022 कक्षा 12 बिहार बोर्ड

   S.NClass 12th Political Science Objective Question 2022
   1.  शीत युद्ध का दौर
   2.  दो ध्रुवीयता का अंत
   3. समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व
   4.  सत्ता के वैकल्पिक केंद्र 
   5.  समकालीन दक्षिण एशिया
   6.  अंतरराष्ट्रीय संगठन 
   7.  समकालीन विश्व में सुरक्षा
   8.  पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन
   9.  वैश्वीकरण
  10.   राष्ट्र निर्माण की चुनौतियां
  11.  एक दल के प्रभुत्व का दौर
  12. नियोजित विकास की राजनीति
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