History Class 12th ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर ) 2024 ( 15 Marks ) PART- 4 || इंटर बोर्ड परीक्षा 2024 इतिहास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर पीडीएफ 2024

History Class 12th :- दोस्तों आज के इस पोस्ट में बिहार बोर्ड कक्षा 12 इतिहास का महत्वपूर्ण लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर दिया गया है। दोस्तों यह प्रश्न उत्तर आपके इंटर बोर्ड परीक्षा में ( 15 Marks ) के पूछे जाते हैं। तथा जितने भी क्वेश्चन दिए गए हैं सभी पिछले साल पूछे जा चुके हैं ,तो दोस्तों यह सभी प्रश्न उत्तर आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए शुरू से अंत तक दिए गए प्रश्न उत्तर को जरूर पढ़ें। 

दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड कक्षा 12 के लिए इतिहास का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर दिया हुआ है यह प्रश्न उत्तर आपके इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा 2024 के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यही सब प्रश्न आपके इंटर बोर्ड परीक्षा 2024 में आ सकते हैं इसलिए इन सभी प्रश्नों को शुरू से अंत तक जरूर देखें।

इतिहास  ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर ) PART – 4

बिहार बोर्ड कक्षा 12 इतिहास दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर 2024 

Q50. औपनिवेशिक काल में नये विकसित नगरों की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ औपनिवेशिक काल में विकसित नगरों की कुछ मूलभूत विशेषताएँ थीं—
(i) नगर व्यापारिक गतिविधियों के केंद्र इस समय विकसित नगर तटीय बंदरगाह थे। समुद्र से निकटता के कारण इन नगरों से आयात तथा निर्यात सुगमता से किये जाते थे। इससे व्यापारिक गतिविधियों में तेजी से वृद्धि हुई।
(ii) किलेबंद बस्तियाँ — अंग्रेज भारतीय शासकों को शंका की दृष्टि से देखते थे, साथ हो फ्रांसिसियों से भी उनकी शत्रता चल रही थी। अतः उन्होंने इंन बस्तियों को सुरक्षा की दृष्टि स किलेबंद करवाई। इन किलेबंद बस्तियों में अंग्रेजों को परास्त कर पाना भारतीयों तथा फ्रासिसियों के लिए काफी कठिन था।
(iii) व्हाइट टाउन एवं ब्लैक टाउन —  इन नवीन नगरों में यरोपीयनों की भारतीयों के प्रति जातीय घृणा तथा नस्लीय भेदभाव को “ब्लैक तथा व्हाइट टाऊन” में देखा जा सकता है। इन नवीन नगरों की कीलेबंद बस्तियों में आमतौर पर युरोपीयन रहा करते थे। भारतीय व्यापारियों, कारीगरों तथा मजदूरों की बस्तियाँ इन किलों के बाहर बसायी जाती थी।
इन बस्तियों को यूरोपीयन ब्लैक टाउन कहकर संबोधित करते थे।
(iv) सस्ते श्रम तथा कच्चे माल की प्रचुर उपलब्धता — इन नवीन विकसित नगरों की एक प्रमुख विशेषता यह थी कि इन नगरों में श्रमिक बहुत कम मजदूरी में उपलब्ध थे। साथ-ही-साथ आस-पास के क्षेत्रों का कच्चा माल भी इन नगरों में एकत्रित होने लगा।


Q51. औपनिवेशिक काल में सार्वजनिक भवनों के निर्माण शैलियों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ सार्वजनिक तथा प्रशासकीय भवनों के निर्माण के लिए इस काल में मुख्यतः तीन शैलियों का प्रयोग किया गया था-नवशास्त्रीय शैली, नव-गॉथिक शैली तथा इन्डो-सारासेनिक शैली। इन शैलियों का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित हैं- .

(i) नवशास्त्रीय शैली — नवशास्त्रीय शैली मूलतः प्राचीन रोम की भवन निर्माण शैली से व्युत्पन्न शैली थी। इस शैली की एक प्रमुख विशेषता बड़े-बड़े स्तंभों के पीछे ज्यामितीय संरचनाओं का निर्माण है। यह शैली प्राचीन रोम की भवन निर्माण शैली थी इस शैली में निर्मित बम्बई का टाउन हॉल तथा एलफिंस्टन सर्किल प्रमुख उदाहरण हैं।
(ii) नवगॉथिक शैली — गॉथिक शैली भी मूलतः पाश्चात्य शैली थी। इस शैली की प्रमुख विशेषताएँ थी—ऊँची उठी हुई छतें, नोंकदार मेहराबें तथा विस्तृत साज-सज्जा। इस शैली में निर्मित विक्टोरिया टर्मिनल्स् सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। .

(iii) इन्डो — सारासेनिक शैली-इस काल की स्थापत्य कला की एक प्रमख विशेषता “इण्डो-सारासेनिक” शैली का विकास था। इस शैली में प्रशासनिक भवन फोर्ट सेंट जार्ज प्रमुख है। इस शैली में यूरोपीयनों के निवास के लिए व्हाइट टाउन बनाया गया था। इसे पूरी तरह कीलेबंद बनाया गया था।


Q52. 19 वीं शताब्दी में नगर-नियोजन को प्रभावित करने वाले तत्त्वों का उल्लेख करें।

उत्तर ⇒ 19 वीं सदी में नगर, नियोजन को प्रभावित करनेवाले निम्नलिखित तत्त्व थे।

(i) शहरों को सुनियोजित रूप प्रदान करने के लिए शहरों के जनसंख्या संबंधी आँकड़े एकत्रित करना तथा नक्शों का निर्माण करना।
(ii) शहरों की जनसंख्या को नियंत्रित करना।
(iii) शहरों में महामारियों को फैलने से रोकने के लिए सफाई की नियमित व्यवस्था करना।
(iv) अंग्रेज महिलाओं, बच्चों व उनकी संपत्ति की रक्षा हेतु भारतीय लोगों की पहँच से दूर अंग्रेज बस्तियाँ बसाना।
(v) अंग्रेजों के मनोरंजन हेतु सिनेमाघरों व क्लबों का निर्माण करना परंतु उन्हें भारतीयों के पहुँच से दूर रखना।
(vi) बंदरगाह और रेलमार्ग बनाकर व्यापार का विकास करना लेकिन साथ ही महत्त्वपूर्ण व्यापारों पर अंग्रेजी अधिकार बनाए रखना।
(vii) रोजगार के साधन बढ़ने पर शहरों में भीड़-भाड़ बढ़ना तथा बहुमंजिली इमारतों का निर्माण होना तथा शहरों में गंदगी बढ़ना।
(viii) शहरों के सही तरीके से रख-रखाव हेतु धन एकत्रित करना।
(ix) शहरों में दूरी बढ़ने के कारण उत्पन्न समस्या को दूर करने के लिए घोड़े गाड़ी, ट्राम व बस की व्यवस्था करना।
(x) भवन निर्माण हेतु किस शैली को अपनाया जाए, शिक्षा हेतु किस पद्धति को अपनाया जाए आदि सभी चिंताओं ने नगर नियोजन को प्रभावित किया।


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Q53. स्वदेशी आंदोलन की विवेचना करें।

उत्तर ⇒ ब्रिटिश वायसराय लार्ड कर्जन द्वारा प्रशासनिक आधार पर 20 जुलाई, 1905 को – विभाजन का निर्णय लिया। बंगाल की एकता को कायम रखने तथा अंग्रेजों के फट डालने नीति का विरोध करने के लिए 7 अगस्त, 1905 को स्वदेशी आंदोलन या बंग-भंग विरोधी आंदोलन शुरू किया गया। इस आंदोलन के दौरान 16 अक्टूबर, 1905 को बंगाल में राष्ट्रीय शोक दिवस मनाया गया। लोग उपवास रखे। कलकत्ता में सार्वजनिक हड़ताल हुई। रक्षा बंधन के त्योहार को हिन्दुओं और मसलमानों ने सांप्रदायिक सद्भाव और एकता के प्रतीक के रूप में मनाया। इसी आंदोलन के दौरान ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार एवं स्वदेशी वस्तुओ के उपयोग पर बल दिया गया। दादा भाई नौरोजी, आनंद बोस, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्रपाल और अरबिंद घोष उग्र राष्ट्रवादी भाषण दिये। लोगों को सामूहिक रूप से शपथ दिलाई गई कि. वे आजीवन स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करेंगे। स्वदेशी आंदोलन का मूल उद्देश्य था अंग्रेजों के आर्थिक हितों पर कुठाराघात करना जिससे वह अपना निर्णय बंम भंग को वापस ले ले। स्वदेशी आंदोलन ने न सिर्फ बंगाल बल्कि पूरे भारत में देश प्रेम और राष्ट्रीयता की भावना का विकास किया। इससे ब्रिटिश आर्थिक हितों को काफी नुकसान हुआ। इसी दौरान स्वदेशी भारतीय उद्योग को प्रोत्साहन मिला। इससे राष्ट्रीय संस्कृति-गंगा यमुनी संस्कृति को काफी प्रोत्साहन मिला। इससे छात्रों, महिलाओं, किसानों, व्यापारियों का राजनीति में प्रवेश हुआ। यानी स्वदेशी आंदोलन ने वह आधार तैयार किया जिसपर आगे चलकर देश स्वतंत्र हुआ।


Q54. गोलमेज सम्मेलन क्यों आयोजित किए गए? इनके कार्यों की विवेचना करें। [2010, 2013A]

उत्तर ⇒ साइमन कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में संवैधानिक. प्रश्नों पर भारतीय नेताओं से विचार-विमर्श करने के लिए गोलमेज सम्मेलन बुलाने का सुझाव दिया था। अतः पहला गोलमेज सम्मेलन लंदन में 1930-31 ई० में हुआ। इस सम्मेलन को कांग्रेस ने बहिष्कार किया क्योंकि उसके प्रायः सभी नेता जेल में बंद थे। अल्पसंख्यकों और अछूतों के प्रश्न पर मतभेद होने के कारण पहला गोलमेज सम्मेलन विफल हो गया। वैसे भी बिना कांग्रेस के भाग लिये हये कोई भी समझौता बेइमानी होती। मार्च 1931 में गाँधी-इरविन समझौता हो जाने के बाद. सितम्बर 1931 में गाँधी जी कांग्रेस क एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया। पहली गोलमेज सम्मेलन का तरह दूसर गोलमेज सम्मेलन भी असफल रहा।
इस सम्मेलन में भी साम्प्रदायिक प्रश्नों को ही प्रमुखता दी गयी। गाँधीजी को निराश होकर वापस हिन्दुस्तान लौटना पड़ा। तीसरा गोलमेज सम्मेलन भी लंदन में 17 नवम्बर, 1932 से 24 दिसम्बर, 1932 तक चला । इसमें भी. कांग्रेस ने भाग नहीं लिया। सच तो यह है कि ब्रिटिश अनुदारवादी सरकार भारत का कुछ देना नहीं चाहती थी यह तो दिखावा मात्र था। मार्च, 1933 में ब्रिटिश सरकार ने एक श्वतपत्र प्रकाशित किया जिसमें भारत के भावी संविधान की रूपरेखा बतायी गयी, जो कि तीनों गालमज सम्मेलनों के निर्णय पर आधारित था। इन्हीं के आधार पर 1935 का भारत शासन आ ब्रिटिश संसद ने पास किया।


Q55. भारत छोड़ो आंदोलन के कारणों का उल्लेख करें। [2013A]

उत्तर ⇒ क्रिप्स मिशन की असफलता से भारतीयों में निराशा और क्षोभ व्याप्त हो गया इस बीच द्वितीय विश्व युद्ध में मित्र राष्ट्र की स्थिति कमजोर पड़ गई थी। ऐसी स्थिति में भारत पा जापानी आक्रमण का खतरा और बढ़ते जा रही थी। इन सभी कारणों से भारतीयों में आतंक बेचैनी बढ़ गई। गाँधीजी के मन में यह बात आयी कि जनता को इस निराशा और घबरा” उबारने का एक मात्र उपाय यह है कि एक अहिंसक आन्दोलन शुरू किया जाए। उन्होंने सो से ‘भारत छोड़ने’ और सता भारतीयों को तत्काल सौंपने की मांग की। इसके लिए बम्बई में ” का अधिवेशन हुआ और इसी अधिवेशन के अवसर पर 8 अगस्त, 1942 को ‘भारत र आन्दोलन’ का प्रस्ताव पास हुआ और गाँधीजी के नेतृत्व में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’  की घोषणा की गई। । भारत छोडो आंदोलन की घोषणा होने के साथ ही अगले दिन 9 अगस्त, 1942 को कर के सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इन घटनाओं ने जनता को अनियंत्रित क्रोधित कर दिया। फलतः गुस्से में जनता ने हिंसा और विरोध का सहारा लिया। सरकारी दमनात्मक कार्रवाइयों ने गुस्से की लहर और भी तीव्र कर दी। डाकखानों में आग लगाना की पटरियों को उखाड़ना, टेलीफोन के तारों को काट देना इत्यादि आन्दोलनकारियों के नि कार्य बन गये। अनेक जगहों पर आन्दोलनकारियों ने समानान्तर सरकारें स्थापित कर ली।


Q56. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कैसे हुई? इसके उद्देश्य क्या है?

उत्तर ⇒ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के पूर्व कलकत्ता एवं अन्य स्थानों में कछ राजनीतिक संगठनों की स्थापना हो चुकी थी परंतु इन सभी संगठनों का स्वरूप क्षेत्रीय था। अखिल भारतीय स्तर पर संगठन की स्थापना की दिशा में पहला सक्रिय प्रयास एक अवकाश प्राप्त अंग्रेज अधिकारी ए० ओ० ह्यूम द्वारा किया गया। वे भारत में अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध बढ़ते असंतोष से चिन्तित थे। वे सशस्त्र संघर्ष की संभावना को टालना चाहते थे। अतः वे ‘सुरक्षा कपाट’ के रूप में कांग्रेस की स्थापना करना चाहते थे। वहीं भारतीय इस बात से सशंकित थे कि अगर वे अपनी कोई राजनीतिक संगठन बनायेंगे तो उन्हें सरकार का कोपभाजन बनना पड़ेगा, जबकि किसी अंग्रेज द्वारा स्थापित संस्था को अंग्रेजी सरकार के विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसलिए भारतीयों ने कांग्रेस की स्थापना में ह्यूम को सहयोग दिया। इस प्रकार भारतीय नेताओं के सहयोग से 5 दिसम्बर, 1885 को ह्यूम ने इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना की घोषणा की।

कांग्रेस का उद्देश्य –

(i) देश सेवा में लगे सभी व्यक्तियों के बीच घनिष्ठता और मैत्री का विकास करना।
(i) जातियता, प्रांतीयता या धार्मिक भावना से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करना।
(iii) राजनीतिक और सामाजिक प्रश्नों पर शिक्षित वर्गों के विचारों को अभिव्यक्त करना।
(iv) आगामी कार्यक्रमों की रूप रेखा निश्चित करना। . इस प्रकार कांग्रेस का जन्म भारत में ब्रिटिश शासन के दुश्मन के रूप में नहीं, आपतु मित्र ‘ के रूप में हुआ था।’


Q57. क्रिप्स मिशन भारत क्यों आया? इसने क्या सुझाव दिए?

उत्तर ⇒ द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटेन को बाह्य और आंतरिक कठिनाइयों से बाध्य होकर भारत की राजनीतिक समस्या पर ध्यान देना आवश्यक हो गया। इस उद्देश्य से ब्रिटिश प्रधानमत्रा चर्चिल ने मार्च, 1942 में स्टैफोर्ड क्रिप्स को भारत भेजा। उन्होंने संवैधानिक सुधारों की एक योजना प्रस्तुत किया, जिसे क्रिप्स मिशन कहा जाता है। इसमें दो प्रकार की व्यवस्था थी—

(i) तत्काल प्रभावी योजना
(ii) युद्ध की समाप्ति के पश्चात् लागू की जाने वाली योजना। सरकार ने तत्काल भारतीयों के सरकार में सहयोग की व्यवस्था की, परन्तु भारत का सुरक्षा आर प्रतिरक्षा का उत्तरदायित्व अपने हाथों में रखा। युद्ध के बाद भारत को डोमिनियम स्टेटस यवस्था की गई। कामनवेल्थ में रहना या नहीं रहना भारत पर निर्भर करता था। संविधान के लिए संविधान सभा का गठन करना था। इसमें प्रान्तों एवं देशी नरेशों को भी अलग नियन स्टेटस पाने का अधिकार दिया गया। साथ ही अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा आश्वासन दिया गया। यह योजना भारतीयों को संतुष्ट नहीं कर सकी। इसमें भारत के विभाजन की “किपी हई थी। कांग्रेस, लीग और अन्य संस्थाओं ने भी इसे अस्वीकृत कर दिया। स्वतंत्रता साजन की माँगें बढ़ने लगी। कांग्रेस ने अगस्त में “भारत छोड़ो आंदोलन” आरम्भ कर दिया।


History Class 12th ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर ) 2024 ( 15 Marks ) PART- 4

Q58. महात्मा गाँधी ने राष्ट्रीय आंदोलन के स्वरूप को किस तरह बदल डाला?

उत्तर ⇒ गाँधीजी ने राष्ट्रीय आंदोलन के स्वरूप को निम्नलिखित विचारों, तरीकों, विचारधाराओं, कार्यप्रणाली, आंदोलन आदि के द्वारा बदल डाला

(i) गाँधीजी स्वदेश आए और 1915 से लेकर जनवरी 1948 तक अपने दर्शन और विचारधारा से लोगों को विभिन्न माध्यमों से अवगत कराते रहे । उनके दर्शन के मुख्य सिद्धांत अथवा आधारभूत स्तंभ थे—

(i) सत्याग्रह, (ii) अहिंसा, (iii) शांति, (iv) दरिद्रनारायणों के प्रति सच्ची हमदर्दी, (v) महिलाओं का सशक्तिकरण, (vi) साम्प्रदायिक सद्भाव, (vii) भारतीय ग्रामीण क्षेत्र एवं उनमें रहने वाले लोगों के हितों के बारे में सोचना, करना और लोगों को प्रेरणा देना,
(viii) अस्पृश्यता का विरोध करना लेकिन हिंदू समाज की एकता को बनाए रखने के लिए पृथकीकरण का विरोध करना, (ix) लक्ष्य और माध्यम दोनों की श्रेष्ठता पर बल देना, (x) कल्याणकारी कार्यक्रमों, (xi) कुटीर उद्योग धंधों, (xii) चरखा, खादी आदि के अपनाने पर बल देना, (xiii) रंगभेद और जाति भेद-भाव का विरोध करना,
(xiv) स्वयं सर्वसाधारण की वेशभूषा, यथासंभव सामान्य लोगों की बोली को अपनाना, साधारण भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी भाषा में लिखना।

(ii) जब वह 1915 में दक्षिण अफ्रिका से स्वदेश लौटे तो उस समय कांग्रेस पार्टी वास्तव में मध्यवर्गीय शिक्षित लोगों की पार्टी थी और उसका प्रभाव कुछ शहरों और कस्बों तक सीमित था। गाँधीजी भली-भाँति जानते थे कि भारत गाँवों का देश है और यह राष्ट्र ग्रामीण लोगों, श्रमिकों, सर्वसाधारण, महिलाओं, युवाओं आदि में निहित है। जब तक ये सभी लोग राष्ट्रीय संघर्ष स नहीं जुड़ेंगे तब तक ब्रिटिश सत्ता को शांतिपूर्ण, अहिंसात्मक आंदोलनों, सत्याग्रहों, प्रदर्शनों, लेखों आदि से हटाना मुश्किल था।

(iii) गाँधीजी ने अपने भाषणों, पत्र-पत्रिकाओं में लिखे लेखों, पुस्तकें आदि के माध्यम से जापानवशिक सत्ताधारियों को यह जता दिया कि भारत में जो सर्वत्र दरिद्रता, भुखमरी, निम्न जीवन तर, शिक्षा, अंधविश्वास और सामाजिक फट देखने को मिलती है उसके लिए, ब्रिटिश शासन । उत्तरदायी है क्योंकि अंग्रेजों ने वर्षों से भारत का न केवल राजनैतिक शोषण किया है बल्कि सका आथिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शोषण भी किया है।

(iv) गाधीजी जानते थे कि जब तक वह किसानों, मजदूरों और सर्वसाधारण के प्रति सरकार, साहूकार, ताल्लुकेदारों आदि के द्वारा किए जा रहे अन्याय और शोषण के विरुद्ध आवाज ” ए तब तक सभी वर्ग के लोग उन्हें अपने में से एक नहीं समझेंगे और वे उनके आह्वान शामिल नहीं होंगे। इसलिए गाँधीजी ने चंपारण में नील के खेतों में काम कर रहे गरीब अहमदाबाद के वस्त्र-मिलों में काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने और खेड़ा जिले के किसानों पर प्राकृतिक विपत्ति जस्व वसली के विरुद्ध जोरदार आवाज उठाई। वस्तुतः । से सेवकों से ही गाँधीजी को राष्ट्रीय जगह गाँव और मध्यमवर्ग तक सीमित आंदोलन का सव प्राप्त हुई। साना पर प्राकृतिक विपत्तियों के बावजूद, ऊँचे भू-राजस्व और कठोरता से की जा के विरुद्ध जोरदार आवाज उठाई। वस्तुत: 1915 और 1921 के मध्य ही थोड़े ॥ गांधीजी को राष्ट्रीय आंदोलन का मुखड़ा, महलों की जगह झोंपड़ियों, शहर की मवर्ग तक सीमित आंदोलन का सर्व-साधारण तक प्रसारित करने में सफलता

(v) गांधीजी हिंदू-मुस्लिम एकता की बात करते थे। वे कहते थे कि दोनों संप्रदाय के लोग उनका दाया और बायीं आँख के समान है। जैसे कोई मानव अपनी आँखों में भेदभाव नहीं करता. उसी प्रकार वह भी हिन्दू और मुसलमानों में कोई भेदभाव नहीं करते थे।

(vi) गाँधीजी पुरुष और स्त्री को समान मानते थे। वह नारी को महान होने के साथ-साथ एक बड़ी शक्ति के रूप में देखते थे। उन्होंने उनके हितों की बात की, उन्हें राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल होना, चरखा कातने, खादी का प्रचार करने, नशाबंदी और शराबबंदी का विरोध करने क साथ-साथ उन दुकानों पर धरणा देने के लिए आह्वान किया जो शराब, विदेशी कपडे, विदेशी सामान आदि बेचती थीं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा ग्राम पंचायतों का समर्थन किया। गाँधीजी ने समाज के दलित वर्ग को न्याय दिलाने के लिए उन्हें हरिजन नाम दिया। गाँधीजी ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया और पुराने ऑटोमन साम्राज्य की मांगों को सहयोग आंदोलन से भी अधिक महत्त्वपूर्ण बताया। जब कभी भी देश में धार्मिक घृणा अथवा दंगे हुए उन्होंने कई बार आमरण अनशन किया, दंगाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा किया और अपने प्रभाव और व्यक्तित्व का प्रयोग सभी संप्रदाय के लोगों और नेताओं को समझने के लिए इस्तेमाल किया।


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Q59. असहयोग आंदोलन के महत्त्व और प्रभावों की विवेचना कीजिये। [2020A)

उत्तर ⇒ असहयोग आंदोलन की शुरुआत का प्रस्ताव सितम्बर, 1920 ई० में कलकत्ता में काँग्रेस के विशेष अधिवेशन में पास हुआ। इसमें सरकारी स्कूलों, सरकारी उपाधियों, अदालतों तथा धारा सभाओं के बहिष्कार का प्रस्ताव पास किया गया। महत्त्व इस आंदोलन का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में विशेष महत्व है। इस आंदोलन ने भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों जैसे किसानों, मजदूरों, छात्रों तथा शिक्षकों, महिलाओं तथा व्यापारी को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा। इसका प्रचार-प्रसार देश के विभिन्न भागों में हुआ। इसी आंदोलन के दौरान हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल मिला। आम जनता के सहयोग से इस आंदोलन को काफी जन समर्थन मिला। प्रभाव असहयोग आंदोलन का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन पर विशेष प्रभाव पड़ा। इसने जन-साधारण में राष्ट्रीय संचेतना का विकास किया। यह गाँधीजी के नेतृत्व में चलाया गया पहला जन आंदोलन साबित हुआ। इसमें राष्ट्रवाद के प्रसार के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा, स्वदेशी वस्त्र, स्वदेशी संस्थाओं एवं राष्ट्रीय भाषा के रूप में हिन्दी की लोकप्रियता में वृद्धि हुई। खिलाफल आंदोलन से जुड़े रहने के कारण हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बल मिला। लोगों में विदेशी समान के बहिष्कार की आदत पड़ने लगी। लोगों में स्वदेशी सामान के उपयोग से देश में पुनः स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा मिला।


Q60. भारत का विभाजन एवं अलिखित स्रोतों से अध्ययन 60. 1947 की माउंटबेटन योजना का वर्णन कीजिए ।

उत्तर ⇒ लार्ड माउंटबेटन 23 मार्च, 1947 को वायसराय होकर भारत आये थे। उन्होंने आते ही भारतीय नेताओं से बातचीत की। इसके बाद वे अपनी योजना पर स्वीकृति लेने के लिए *18 मई, 1947 को लंदन गये। वहाँ से 3 जून, 1947 को लौटकर अपनी योजना प्रकाशित की। माउंटबेटन योजना की मुख्य बातें इस प्रकार थीं

(i) पाकिस्तान की स्वीकति — इस योजना द्वारा भारत के विभाजन को स्वीकार कर लिया गया। यह निश्चित हुआ कि भारत को दो राज्यों में विभाजित किया जाएगा—भारत आर पाकिस्तान। दोनों को ही 15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्रता दे दी जाएगी।
(ii) लँगडा पाकिस्तान — मो० जिन्ना पाकिस्तान में समस्त बंगाल व समस्त आसाम, समस्त जाब चाहते थे। परन्तु माउंटबेटन योजना में ऐसा नहीं किया गया। आसाम को पाकिस्तान से अलग किया गया जैसा की कांग्रेस चाहती थी, क्योंकि वहाँ हिन्दुओं का बहुमत था। इस योजना में पाकिस्तान में वही भाग शामिल किये गये, जहाँ की मुस्लिम बहुमत था।
(iii) जनमत संग्रह — योजना द्वारा पाकिस्तान, सिन्ध, बलुचिस्तान, उत्तरी-पश्चिमी सीमा प्रान्त तथा आसाम के सिलहट जिले के मुस्लिम बहुमत वाले क्षेत्रों में जनमत संग्रह के द्वारा भारत में रहने या न रहने की निर्णय की व्यवस्था की गई।
(iv) दोनों राज्यों को राष्ट्रमण्डल से पृथक होने का अधिकार दिया गया।
(v) रियासतों के संबंध में कहा गया कि 15 अगस्त, 1947 से उनके ऊपर से ‘ब्रिटिश सर्वोपरिता’ हटा ली जाए और उन्हें दोनों राज्यों में से किसी में भी मिलने अथवा अपनी स्वतंत्रता की घोषणा करने का अधिकार होगा।
(vi) सीमा आयोग — योजना में एक सीमा आयोग की बात कही गयी, जो जनमत संग्रह के बाद विभिन्न क्षेत्रों में प्रान्तों की सीमा का निर्धारण करेगा। उपर्युक्त माउंटबेटन योजना को मुस्लिम लीग ने 9 जून को और कांग्रेस ने 15 जून, 1947 को आवश्यक बुराई के रूप में स्वीकार कर लिया।


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Q61. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में पं० जवाहर लाल नेहरू के योगदानों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में पं० जवाहर लाल नेहरू की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। ये राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान गाँधीजी के पक्के सहयोगी एवं समर्थक थे। राजनीति में सर्वप्रथम 1919 में बाल गंगाधर तिलक के होमरूल आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। 1920 के असहयोग आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इलाहाबाद नगरपालिका बोर्ड के अध्यक्ष रहते हुए कई सुधार किये। पं० नेहरू की अध्यक्षता में ही काँग्रेस द्वारा रावी नदी के किनारे पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव पारित किया था। 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया तथा जेल भी गए। ये काँग्रेस के कई बार अध्यक्ष भी चुने गए। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लिये। 1946 में इनकी अध्यक्षता में अंतरिम सरकार बनाई गई। स्वतंत्रता के बाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने तथा .27 मई, 1964 ई० तक अपनी मृत्यु पर्यन्त कार्य करते रहे। पं० नेहरू राजनीतिक रूप से पक्के गाँधीवादी थे। आर्थिक उन्नति के लिए इन्होंने देश में पंचवर्षीय योजना की शुरुआत की। देश में कई उद्योग धंधों की शुरुआत हुई। पं० नेहरू आधुनिक वैज्ञानिक तथा प्रौद्योगिक ज्ञान के कट्टर समर्थक थे। अनेकों वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान की स्थापना किये। विदेश नीति में इन्होंने गटनिरपेक्षता की नीति अपनाकर भारत को विकास की ओर उन्मुख किये। सच्चे अर्थों में पं. नेहरू स्वतंत्र भारत के निर्माता थे।


Q62. भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताओं को लिखें। [2020A]

उत्तर ⇒ भारतीय संविधान दो वर्ष ग्यारह महीने अठारह दिनों में बनकर तैयार हुआ। 26 जनवरी, 1950 को पूरे भारत में लागू किया गया। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं—

(i) लिखित तथा विशाल संविधान — भारतीय संविधान लिखित है। इसके निर्माण में कई दशा के संविधान का अध्ययन कर उसकी अच्छाइयों को समाहित किया गया। इस कारण यह काका विशाल भी है। इसमें 395 धाराए. 22 भाग तथा अनुसूचियाँ है। आज तक कई सविधान संशोधन किये गए हैं।

(ii) विषयों का बंटवारा— भारतीय संविधान में विषयों का बँटवारा किया गया है। केंट सूचा म सेना, रेलवे आदि विषय है, राज्य सची में राजस्व, नगरपालिका आदि को रखा गया है जबकि समवर्ती सूची में शिक्षा को रखा गया है। 
(iii) धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना— भारतीय संविधान के अनुसार भारत का मानना वापत किया गया है। इसके अनसार भारत में विभिन्न धर्मों के अनयायियों के मध्य बंधव को भावना पैदा करने के लिए और राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए भारत को धर्म निरपेक्ष घोषित किया गया। इसके अलावे इकहरी नागरिकता, मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य राज्य के नीति निर्देशक तत्व, वयस्क मताधिकार, छुआछूत का अंत, राष्ट्रभाषा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता इसकी प्रमुख विशेषता है।


Bihar Board Inter Exam 2024 Question Answer

S.NClass 12 History Model Paper 2024
1.  class 12th History Model Paper – 1
2.  class 12th History Model Paper  – 2
3.  class 12th History Model Paper – 3
4.  class 12th History Model Paper – 4
5.  class 12th History Model Paper – 5
S.N12th History Subjective Question Answer 2024
1.12th History  ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 1
2.12th History  ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART – 2
3.12th History  ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 3
4.12th History  ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART – 4
5.12th History  ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 5
6.12th History  ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 6
7.12th History  ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 7
8.12th History  ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 8
9.12th History  ( लघु उत्तरीय प्रश्न ) PART- 9
10.12th History  ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) PART- 1
11.12th History  ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) PART- 2
12.12th History  ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) PART- 3
13.12th History  ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) PART- 4
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